
जबलपुर (जयलोक)। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हुई बाघ के शाव की मौत के मामले में गंभीर इंफेक्शन कारण बताया जा रहा है। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इसकी जाँच विशेषज्ञों की टीम कर रही है। बताया जा रहा है कि बाघ का शावक 10 से 12 महीने का था। सूचना मिलते ही जबलपुर से वेटरनरी यूनिवर्सिटी, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, वरिष्ठ वन अधिकारियों और डॉग स्क्वॉड की टीम भी जाँच के लिए पहुँची। टीम ने शावक का पोस्ट मार्टम भी किया और आसपास के क्षेत्र की धातु या संदिग्ध वस्तुओं की जाँच के लिए मेटल डिटेक्टर का उपयोग भी किया।

20 नवंबर को मिला था शव
शावक का शव 20 नवंबर को बांधवगढ़ के खुड्डा बीट के कंपार्टमेंट की सीमा पर मिला था। प्रारंभिक जाँच में बाघ के शावक की मौत को संदिग्ध माना गया। लेकिन जाँच में यह बात भी सामने आई कि शावक कई दिनों से बीमार था जिसके कारण उसके शरीर में संक्रमण बढ़ता गया और उसकी मौत हो गई।

विशेष टीम कर रही जाँच- वन्यजीव की जाँच के लिए विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक विशेष टीम बनाई है। इसमें डॉ. अनमोल रोकड़े, डॉ. रमेश तिवारी, डॉ. प्रशांत देशमुख सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम फील्ड से नमूने इक_ा कर लैब भेज रही है, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद शावक की मौत का कारण स्पष्ट होगा। वन अधिकारियों ने बताया कि जंगल में कोई जख्म, संघर्ष या शिकार से जुड़ा प्रमाण नहीं मिला। पीएम में भी यह पुष्टि हुई कि मौत अंदरूनी इंफेक्शन के कारण हुई प्रतीत होती है। शव को नियमों के अनुसार जंगल में ही दफना दिया गया। अब रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि यह संक्रमण प्राकृतिक था या किसी बाहरी कारण से हुआ।

Author: Jai Lok







