
जबलपुर (जयलोक)। शहर की सड़को पर दौड़ रहे ई-रिक्शा के चालकों पर नजर दौड़ाई जाए तो इनमें नाबालिग चालक भी नजर आएंगे जो कम उम्र में ई-रिक्शा की कमान अपने हाथों में लेकर सडक़ों पर फर्राटा मार रहे हैं। इन कम उम्र के रिक्शा चालकों के कारण सडक़ों पर सडक़ हादसे भी हो रहे हैं।
अनुमान के मुताबिक जबलपुर में करीब 5300 ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में नाबालिग ई-रिक्शा चला रहे हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यात्रियों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है।

जाम की बड़ी वजह बनते जा रहे ई-रिक्शा
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार शहर की प्रमुख सडक़ों पर लगने वाले जाम का एक बड़ा कारण ई-रिक्शा साबित हो रहे हैं। इनकी अधिकतम गति 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा होने के कारण मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। खासतौर पर पीक आवर्स में जब एक ही रूट पर सैकड़ों ई-रिक्शा चल रहे होते हैं, तब स्थिति और भी विकट हो जाती है। ओवरटेकिंग में बाधा, संकरे ढांचे और अनियंत्रित स्टॉपेज से जाम की समस्या रोजमर्रा की बात बन गई है।

प्रतिबंध के बावजूद सड़को पर दौड़ते ई-रिक्शा
कुछ माह पूर्व जुलाई महीने में प्रशासन ने शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा के संचालन पर प्रतिबंध लगाया था। बावजूद इसके सभी प्रतिबंधित सडक़ों पर ई-रिक्शा धड़ल्ले से चलते पाए जा रहे हैं। ई-रिक्शा से जुड़े हादसों की आशंका लगातार बनी हुई है। ओवरलोडिंग, इंजन की आवाज न होना, जिससे दूसरे वाहन चालकों को मूवमेंट का अंदाजा नहीं लग पाता, चढ़ाई वाले रास्तों पर रुक-रुककर चलना और पलटने का खतरा जैसे कारण दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। घाट या ऊंचाई वाले इलाकों में ई-रिक्शा के असंतुलित होने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।

इंदौर मॉडल से मिल सकती है राह
इसी तरह की समस्या इंदौर में भी सामने आई थी। वहां ट्रैफिक जाम से निजात पाने के लिए ई-रिक्शाओं को 10 सेक्टरों और कलर कोडिंग सिस्टम में बांटने की तैयारी की गई है। हर सेक्टर का अलग रंग होगा और उसी रंग के आधार पर ई-रिक्शा का रूट तय रहेगा। वाहन पर सेक्टर क्रमांक, यूनिक नंबर और चालक की जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित की जाएगी। इंदौर में करीब साढ़े दस हजार ई-रिक्शा हैं और इस नवाचार से जाम की समस्या पर नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
चालानी कार्रवाई पर होता है विरोध
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जब भी नियमों का उल्लंघन करने वाले ई-रिक्शाओं के खिलाफ चालान या जब्ती की कार्रवाई की जाती है, तो कई चालक विरोध पर उतर आते हैं। हंगामा, बदसलूकी और यहां तक कि आत्महत्या की धमकी देने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। अधिकांश चालक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और किश्तों पर ई-रिक्शा खरीदते हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो जाती है।
जबलपुर में क्या होगा अगला कदम
अब सवाल यह है कि क्या जबलपुर प्रशासन भी इंदौर की तरह सेक्टर और कलर कोडिंग सिस्टम अपनाएगा या फिर मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू कर शहर को जाम से राहत दिलाएगा। पुलिस की रिपोर्ट ने समस्या की गंभीरता उजागर कर दी है, अब प्रशासनिक फैसलों पर शहरवासियों की नजरें टिकी हैं।
Author: Jai Lok







