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सुरक्षित फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी हाईकोर्ट को तीन महीने में निर्णय सुनाने का निर्देश

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित मामलों में फैसले सुनाने में होने वाली देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी हाईकोर्टों के लिए विस्तृत और बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया जाता है, उनमें यथासंभव तीन महीने के भीतर निर्णय सुनाया जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों, विशेषकर नियमित जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं में विशेष तत्परता बरती जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए। यदि फैसला सुरक्षित रखा जाता है तो उसे अगले दिन सुनाना अनिवार्य होगा।

क्या है पूरा मामल?

शीर्ष अदालत ने यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट में लंबित कुछ आपराधिक अपीलों की सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनकी अपीलों पर सुनवाई पूरी होने के बावजूद दो से तीन साल तक फैसला नहीं सुनाया गया, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है। इसलिए सभी हाईकोर्ट को समयबद्ध तरीके से फैसले सुनाने और उन्हें सार्वजनिक करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट की 10 बड़ी बातें
८ आरक्षित मामलों में कारणयुक्त फैसला तीन महीने के भीतर सुनाने का प्रयास किया जाए।
८ जमानत और अग्रिम जमानत से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
८ जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनाया जाए।
८ जमानत मिलने पर आदेश तुरंत जेल प्रशासन को भेजा जाए ताकि रिहाई में देरी न हो।
८ खुले न्यायालय में सुनाए गए फैसलों को 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।
८ यदि केवल ऑपरेटिव आदेश सुनाया गया है तो विस्तृत फैसला 15 दिनों के भीतर अपलोड करना होगा।
८ तीन महीने तक फैसला नहीं आने पर मामला मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लाया जाएगा।
८ तीन महीने और अतिरिक्त एक माह की देरी होने पर पक्षकार मामले को दूसरी पीठ को सौंपने की मांग कर सकेंगे।
८ हाईकोर्ट की वेबसाइट पर आरक्षित फैसलों की स्थिति और तारीखें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी।
८ फैसला अपलोड होने पर पक्षकारों और वकीलों को ई-मेल के माध्यम से सूचना दी जाएगी।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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