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सेटेलाइट ने पकड़ी पराली जलाने की 1760 घटनाएँ, अब तक किसी भी मामले में नहीं हुई जुर्माने की कार्रवाही

जबलपुर (जयलोक)। जिला प्रशासन के सख्त रूख के बाद भी जिले में पराली जलाने के मामले में वृद्धि हुई है। अभी तक जिले में 1760 घटनाएं सेटेलाइट मॉनिटरिंग से दर्ज की गई हैं। कलेक्टर ने साफ कहा है कि पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाही की जाएगी। लेकिन इसके बाद भी शहर के आसपास किसानों द्वारा पराली जलाई जा रही है।
इस पर नियंत्रण करने के लिए कलेक्टर ने तीन सदस्यीय टीम भी गठित की है। जो इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं पराली जलाने से रोकने के लिए सेटेलाइट का भी सहारा लिया जा रहा है। लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। जो इतनी सख्ती के बाद भी बाज नहीं आ रहे हैं। उप संचालक कृषि डॉ. एसके निगम का कहना है कि किसान यदि अपने खेत में पराली जलाते हैं तो दो एकड़ तक दो हजार 500 रूपये, दो एकड़ से 5 एकड़ तक पाँच हजार एवं 5 एकड़ से अधिक रकबे में 15 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। किसानों को निर्देश दिए गए हैं कि पराली जलाने के बजाए पराली का उचित प्रबंधन करें। जिसके लिए रोटावेटर मल्चर का उपयोग करें।

दो सप्ताह में ही डेढ़ हजार से ज्यादा मामले

कलेक्टर के आदेश को किसान कितनी गंभीरता से लेे रहे हैं ये दो सप्ताह के आंकड़े देखने में भी सामने आ गया। महज दो सप्ताह में ही 17 सौ से अधिक मामले पराली जलाने के सामने आए। हालांकि जिला प्रशासन ने जुर्माने की रकम भी निर्धारित कर दी है। लेकिन इसमें जुर्माना वसूलने की कार्रवाही अब तक नहीं की गई।

एसडीएम बनाएँगे रिपोर्ट

इस मामले में उप संचालक कृषि डॉ. एसके निगम ने बताया कि अब तक जिले में 1760 मामले पराली जलाने के सामने आए हैं। इन मामलों की जाँच रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी गई है। जिसमें एसडीएम आंकड़ों के हिसाब से जुर्माने की राशि तय करेंगे।

किसानों का कहना है कि खर्चीला है पराली प्रबंधन का तरीका

वहीं इस मामले में किसानों का कहना है कि जिस तरह से जिला प्रशासन पराली के प्रबंधन की बात कह रहा है वह छोटे किसानों के खर्च के बाहर है। किसानों ने कहा है कि रोटावेटर मल्चर से पराली नष्ट करना खर्चीला है जो छोटे किसानों के लिए संभव नहीं हैं। इसलिए किसान पराली जला रहे हैं।

इनका कहना है

अब तक 1760 मामले पराली जलाने के सामने आए हैं जिसमें एसडीएम के आदेश के बाद जुर्माने की कार्रवाही की जाएगी।
डॉ. एसके निगम,  उप संचालक कृषि

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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