
जबलपुर (जयलोक)। बुधवार को कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा संसद में ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ पर हुई चर्चा में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। जिसमें उन्होंने जबलपुर को स्पीड पोस्ट हब से हटाए जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि इंदौर एवं भोपाल स्पीड पोस्ट हब में शामिल हैं जबकि जबलपुर को शामिल नहीं किया गया है। जिसका सीधा असर डाक सेवाओं पर पड़ रहा है। इससे जबलपुर में इसका विरोध देखा जा रहा है। जिस पर जवाब देते हुए केन्द्रीय विधि एवं कानून मंत्री अर्जुन सिंह मेघवाल ने कहा कि जबलपुर के जिस विषय को उठाया गया है वह उस पर ध्यान देंगे।
श्री तन्खा ने कहा कि पहले जो कार्ट सर्विस रजिस्टर्ड पोस्ट से जाती थी सरकार ने उसे स्पीड पोस्ट से भेजने का प्रावधान कर दिया है। जिससे जो काम पहले दो दिन में हो जाता था वह अब 6 दिनों में होगा। जबकि समय अब फास्ट डिलेवरी का है।

कानूनों पर चर्चा
विवेक तन्खा ने राज्यसभा में इस विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान अपनी राय रखी। उन्होंने इस बात से असहमति जताई कि यह विधेयक कानूनी प्रणाली के ‘औपनिवेशिकरण’ को खत्म करने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जमीन पर लोगों पर बिल के प्रभाव का आंकलन किए बिना केवल तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कागजी कार्रवाई की है।

नागरिकों के लिए बनी परेशानी का कारण
सांसद श्री तन्खा ने कहा कि सरकार के कथित प्रशासनिक सुधार जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उन्होंने सदन को बताया कि पूर्व में न्यायालयों को नोटिस रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजे जाते थे। लेकिन स्पीड पोस्ट को अनिवार्य किए जाने और मप्र में केवल भोपाल और इंदौर में डाक हब सीमित होने के कारण अब नोटिस 6 दिनों में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानूनों का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, और प्रभावी बनाना है। लेकिन वर्तमान संशोधन कई मामलों में व्यवस्था को और अधिक जटिल और बोझिल बना रहे हैं।

Author: Jai Lok







