
जबलपुर जय लोक।शहर की प्रख्यात वरिष्ठ महिला चिकित्सक डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव अब स्वर्गवासी हो चुकी हैं। उनके अंतिम दिनों में उनके करोड़ों की संपत्ति को लेकर बनाए गए दान पत्र और जबरदस्ती अपहरण की शैली में उन्हें रजिस्ट्री ऑफिस ले जाए जाने के घटनाक्रम ने उन्हें पूरे प्रदेश और देश में चर्चित बना दिया।
वरिष्ठ महिला डॉक्टर के साथ इंसाफ हो इस बात की माँग को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टरों ने भी मोर्चा संभाल लिया था और उन्होंने जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मुलाकात कर उनकी पूरी चिकित्सा व्यवस्था और उनकी संपत्ति की रक्षा की माँग की थी।
कलेक्टर के निर्देश के बाद 50 करोड़ के आसपास की अनुमानित संपत्ति के संबंध में हुए दान पत्र एवं अन्य लिखा पड़ी की जाँच एसडीएम अधारताल पंकज मिश्रा कर रहे हैं। यह मामला एसडीएम कोर्ट के अंतर्गत है। भले ही डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की मृत्यु हो चुकी है लेकिन मामले की सुनवाई जारी रहेगी उनकी बहनों को इस मामले में उत्तराधिकारी बनाकर प्रकरण की पूरी सुनवाई की जाएगी।

वहीं इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब डॉ. हेमलता की संपत्ति पर दावे आपत्ति का खेल शुरू हो जाएगा। आगे चलकर इसमें तरह-तरह के घटनाक्रम भी नजर आने की पूरी आशंका व्यक्त की जा रही है।
महिला डॉक्टर की प्रॉपर्टी उसकी वृद्धा अवस्था में गले की फांस बन गई थी। जीते-जी जो संपत्ति उनके काम नहीं आई वो मरने के बाद भी कष्ट दे रही है।
इस मामले में इतनी अलग-अलग बातें सामने आ चुकी हैं कि डॉक्टर हेमलता की बहनों पर भी संदेह की उंगलियां उठी हैं वहीं उनकी सेवा का दावा करने वाले डॉक्टर सुमित जैन और उनकी पत्नी डॉक्टर प्राची जैन पर भी संदेह की नजरें बनी हुई हैं। संपत्ति का आधा हिस्सा गायत्री ट्रस्ट को जाने की बात भी कई प्रकार के संदेहों से घिर चुकी है।

क्या मतलब की ऐसी करोड़ की संपत्ति जो बूंद-बूंद पानी को तरसाए
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव के पति और पुत्र के देहांत होने के बाद डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव अपनी वृद्धावस्था में अपनी ही प्रॉपर्टी के बोझ तले हैरान परेशान थी। अब इस बात पर भी चिंतन मनन हो रहा है कि क्या मतलब की ऐसी करोड़ों रुपए की संपत्ति जो अंतिम समय में गले की फांस बन जाए और जिसके कारण आदमी को बूंद-बूंद पानी के लिए भी तरसना पड़े। यहां तक कि जीवन भर दूसरों की सेवा करने वाली डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव को अंतिम समय में चिकित्सीय सेवा के लिए भी मोहताज होना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन को की गई शिकायत में इस बात के आरोप लगे हैं कि डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के पड़ोसी डॉक्टर सुमित जैन एवं उसकी पत्नी डॉक्टर प्राची जैन ने मिल कर डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव को षडयंत्र पूर्वक बेटे और पति की मृत्यु के बाद से दिखावटी मदद करते हुए एवं इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के मकान के पास की शेष बची हुई खाली जमीन को एनकेन प्रकरेन हथियाने के षड्यंत्र में लग गए।
यह बातें भी शिकायत में सामने आई हैें कि डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की सगी बहन
कनकलता श्रीवास्तव एवं एक अन्य बहन के साथ-साथ डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के घर पर काम करने वाली नौकरानी एवं जबलपुर के कुछ बड़े व्यवसायियों की भी नजर डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की प्रॉपर्टी पर गिद्ध की तरह गड़ी रही। सब लोग मिलकर डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की पूरी प्रॉपर्टी को हथियाना चाहते हैं। कोई फर्जी विल बनाकर, तो कोई फर्जी रजिस्ट्री करा कर तो कोई दान पत्र लिखवा कर। बीमारी और मानसिक परेशानियों के बीच डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के हस्ताक्षर अथवा अंगूठे भी लगवा लिए गए।
इस बात की भी चर्चा है कि डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की धर्म के प्रति प्रगाढ़ आस्था होने के कारण नियमित रूप से जबलपुर के गायत्री मंदिर में आना-जाना लगा रहता था उनके बीमार होने के 2 दिन पूर्व ही वे गायत्री मंदिर में किसी के शादी समारोह में सम्मिलित होने गई थीं और उन्होंने अपनी मर्जी से अपनी प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा गायत्री मंदिर को दान देने का मन बनाते हुए अपनी इच्छा अपनी सगी बहन से व्यक्त की थी। उसी के अनुरूप उनकी बहन कनक लता श्रीवास्तव गायत्री मंदिर परिवार को दान पत्र की कार्रवाई हेतु प्रयास कर रही थी।
अब मामला न्यायालय के समक्ष है। एसडीएम न्यायालय में प्रॉपर्टी से जुड़ी हर लिखा पड़ी दस्तावेज दान पत्र और रजिस्ट्री की जांच की जाएगी। सभी संबंधितों के बयान दर्ज होंगे और साक्ष्य लिए जाएंगे। उसके बाद इस बात का अंतिम निर्णय होगा की संपत्ति शासन के पक्ष में जाएगी या फिर स्वर्गीय डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के परिजनों को कब्जा मिलेगा या जिनकी दान पत्र में रजिस्ट्री हुई है उन्हें सही माना जाएगा।
बहन ने किया डॉ. हेमलता का अंतिम संस्कार
डॉ. हेमलता के कल हुए निधन के पश्चात पोस्टमार्टम आदि की कार्रवाही पूरी होने के बाद उनका शव उनकी बहन शांति बाई को सौंप दिया गया। डॉ. हेमलता का अंतिम संस्कार उनकी बहन ने गौरीघाट में संपन्न किया।
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Author: Jai Lok







