
आज से ठीक 76 वर्ष पूर्व 26 जनवरी 1950 को भारत ने न केवल अपना संविधान अपनाया था बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी नियति का निर्धारण भी किया था। आज का दिन केवल परेड और झांकियाँ के प्रदर्शन का नहीं है बल्कि यह आत्म मंथन का अवसर है कि एक राष्ट्र के रूप में हमने क्या पाया है और क्या खोया है और हमारी चुनौतियाँ क्या हैं। भारत की यात्रा एक उम्मीद से शुरू होकर आज विश्वास में बदल चुकी है जहाँ कई नये स्वतंत्र राष्ट्र अस्थिरता के दौर में बिखर गए वहीं भारत ने अपनी विविधता को कमजोरी के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है। आज हम विश्व की सबसे बड़ी पाँचवीं अर्थव्यवस्था हैं और डिजिटल क्रांति से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक तिरंगा हर शिखर पर लहरा रहा है। भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का जीवंत प्रतीक है। यह हमें न्याय, स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व का पाठ पढ़ाता है। तकनीक के युग में जब सूचनाओं का अंबार है और समाज ध्रुवीकरण की चुनौतियों से जूझ रहा है संविधान की प्रस्तावना में निहित धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक गणराज्य के आदर्श हमारे लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करते हैं। गणतंत्र का अर्थ केवल अधिकारों की प्राप्ति नहीं बल्कि कर्तव्यों का निर्वहन भी है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की ओर कदम बढ़ा रहे हैं तो हमें कुछ मूलभूत प्रश्नों पर ध्यान देना होगा। आर्थिक असमानता को दूर करने विकास का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक कैसे पहुंचे, पर्यावरण जलवायु परिवर्तन के दौर में सतत विकास को कैसे प्राथमिकता दी जाए, सामाजिक समरसता घृणा और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना में कैसे सुधार हो ये मूलभूत प्रश्न उठ रहे हैं। गणतंत्र दिवस हमारे पूर्वजों के बलिदान को याद करने और भविष्य की पीढ़ी के लिए एक समृद्ध समावेशी और सुरक्षित भारत बनाने के संकल्प का दिन है। गणतंत्र की सफलता इस बात में है कि एक नागरिक के तौर पर हम अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी निष्ठा से निभा रहे हैं। आज का सूर्योदय एक नए भारत का आवाहन कर रहा है। एक ऐसा भारत जो आधुनिक भी हो और अपनी जड़ों से जुदा भी न हो। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
इस बार गणतंत्र दिवस पर 982 पुलिस कर्मियों को दिए जाएंगे सेवा मेडल
Author: Jai Lok







