Download Our App

Home » जीवन शैली » हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक…

हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक…

चैतन्य भट्ट
(जय लोक)। कितनी आशा भरी नजरों से तमाम भारतीय जनता पार्टी के वे नेता जो निगम मंडलों में एडजस्ट होना चाहते थे हाई कमान, मुख्यमंत्री, संगठन मंत्री की तरफ देख रहे थे, जिस दिन नौ बड़े नेताओं की बैठक हुई उन्हें लगा बस अब वो वक्त आ चुका है जब उन्हें निगमों में, मंडलों में, आयोगों में, प्राधिकरणों में नियुक्ति के आदेश मिल जाएंगे। हर नेता ने खादी के नए कुर्ते पजामे सिलवा लिए कि किसी भी दिन उन्हें गद्दी नसीब हो जाएगी जिसके लिए वे पिछले बीस महीने से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन फिल्म ‘शराबी’ का एक गाना ‘इंतहा हो गई इंतजार की आई ना कुछ खबर निगम मंडलों की’ इन लोगों पर पूरी तरह से फिट बैठ गया। रोज अखबारों में छप रहा था कि बस निगम मंडलों में  नियुक्ति की सूची बन चुकी है किसी भी दिन उन नेताओं को खबर कर दी जाएगी लेकिन उनके तमाम अरमानों पर उस वक्त पानी फिर गया जब ये खबर आई कि जो ताजपोशी होने वाली थी वो ‘एक्सटेंड’ हो गई और उसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि बिहार में चुनाव हैं दिसंबर में, और यहां के  नेताओं को बिहार में चुनाव प्रचार में भेजा जाएगा। जहां एक प्रदेश के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी जी जान लड़ा रही हो वहां किसको फुर्सत है कि निगम मंडलों में नियुक्तियां करें। जब बीस महीने में नियुक्ति नहीं हुई तीन-चार महीने में ऐसी कौन सी आफत आ जाएगी, आसमान गिर पड़ेगा, पहले बिहार तो जीत लें उसके बाद फिर देखा जाएगा कि किसको क्या दिया जाए, लेकिन अपने को तो उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बड़ी दया आती है बेचारे कब से राह तक रहे हैं कि कुछ तो मिल जाए। उनकी झोली में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ना सही सदस्य की ही पोस्ट गिर पड़े लेकिन उसकी भी आशा नहीं दिख रही है। अब तो लगता नहीं कि आगामी दो चार महीने ये संभव हो पाएगा। इंतजार की भी एक सीमा होती है कितना इंतजार करें इंसान। लोग बात कहते हैं ‘आशा से आसमान टंगा है’ लेकिन यहां तो जब से ये खबर आई है कि अभी ताजपोशी नहीं होगी तो वह आशा वाला आसमान इनके ऊपर गिर पड़ा है। अरे भाई दे दो चार छह को नियुक्तियां थोड़ा तो दिल में चैन आ जाएगा लेकिन पार्टी तो कुछ सोचने तैयार नहीं। अपने को तो लगता है कि इसी इंतजार में पूरे पांच साल बीत जाएंगे और ये बेचारे नेता कार्यकर्ता बस यही गाना गाते गाते फिर चुनाव में सक्रिय हो जाएंगे, हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक, खुदा करे कि कयामत हो और हमें कुर्सी मिल जाए।

नाम में ही अंधेर

जिसके नाम में ही ‘अंधेर’ जुड़ा हो उसमें ‘अंधेरगर्दी’ ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता, अब देखो ना हरदा जिले की ‘अंधेरखेड़ी’ गांव में  दो साल पहले वहां के तत्कालीन अपर कलेक्टर ने अवैध खनिज के मामले में एक कंपनी पर 51 करोड़ 65 लाख का जुर्माना लगाया था बाद में हुजूर का तबादला हो गया और एक नए हुजूर वहां आ गए और देखते ही देखते उन्होंने 51 करोड़ 64 लाख की पेनल्टी को ‘साढे चार हजार’ में बदल दिया, ये खबर अखबारों की सुर्खियां बन गई कि एक अफसर 51 करोड़ की पेनल्टी लगा रहा है और दूसरा अफसर मात्र साढ़े चार हजार की। अरे भाई ये अफसर हैं अफसर यानि भगवान वो कुछ भी कर सकता है उसके हाथ में ताकत होती है बड़े-बड़े नेता अफसर के सामने हाथ जोड़ खड़े रहते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि हम तो पांच साल के मेहमान हैं ये तो पैंतीस साल नौकरी करेंगे और न जाने कब इनसे काम पड़ जाए। लेकिन मानते हैं उस अफसर को जिसने इक्यावन करोड़ को साढे चार हजार रुपए में बदल दिया। भारी हल्ला मच रहा है इस बात को लेकर लेकिन साढे चार हजार रुपए की पेनल्टी लगाने वाले अपर कलेक्टर का कहना है कि मैंने जो कुछ किया है सही किया दरअसल कंपनी की नहीं खनिज डिपार्टमेंट की गलती थी और तो और डिपार्टमेंट के तमाम लोग अपने-अपने बयानों से पलट गए, इसको कहते हैं अफसर का जलवा। अब इसमें क्या-क्या खेल हुए होंगे किसको कितना हिस्सा मिला होगा इस बारे में अपने पास तो कोई जानकारी नहीं है लेकिन समझने वाले तो सब समझ ही गए होंगे कि ऐसा हुआ कैसे होगा, क्योंकि आजकल तो अगर आपके पास गांधी जी वाले नोटों की गड्डियां हैं तो आप जो चाहे कर सकते हैं बड़ी ताकत है इन नोटों में। उनकी ताकत के सामने कोई भी ताकत नहीं ठहरती अब देखना ये है कि सरकार इस मसले पर क्या करती है।

उस बेचारे को क्या मालूम था

झपट्टा मारकर मोबाइल चुराने वाले उन बेचारे लुटेरों को क्या मालूम था की जिस व्यक्ति का मोबाइल वे झपट्टा मार कर ले जाने में कामयाब हो गए हैं वे प्रदेश पुलिस के एक बहुत बड़े अफसर हैं। चूंकि मामला एक पाश कॉलोनी का था और वहां इंटेलिजेंस के सबसे बड़े अफसर के हाथ से लुटेरे मोबाइल लूट कर भाग गए तो समूचे पुलिस डिपार्टमेंट में हडक़ंप मच गया। सारे जिले की पुलिस एक्टिव हो गई और फिर आकाश पाताल एक करने के बाद उन तीनों को पुलिस ने धर लिया। चूंकि ये इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के बड़े अफसर का मसला था तो अपने को तो लगता है कि इनका जो इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट है वो पूरी तरह से फेल साबित हो गया। कम से कम इंटेलिजेंस को ये तो मालूम होना चाहिए कि किस इलाके में कौन सा गिरोह सक्रिय है कौन झपट्टा मार के मोबाइल झपट लेता है, अगर इतनी भी खबर इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट को नहीं है तो वे क्या खाक खुफिया जानकारी इकठ्ठी करते होंगे। बहरहाल अब साहब जब भी सैर करने जाते होंगे तो अपने साथ एक दो अर्दली जरूर ले जाते होंगे या फिर उस बीच ना तो फोन अटेंड करते होंगे और ना ही किसी को फोन करते होंगे, चुपचाप जेब में मोबाइल रखकर सैर करके आ जाते होंगे। अभी लुटेरे जो पकड़े गए हैं वे भी कान पडक़र कसम खा रहे होंगे कि जिसका भी मोबाइल छीनना है पहले उसके बारे में पूरी जानकारी इकठ्ठी करना होगी कि ये कहीं कोई बड़ा अफसर तो नहीं है पुलिस डिपार्टमेंट का। अगर है तो दूर से ही नमस्ते करके निकल जाएंगे इसी में उनका फायदा होगा।

सुपरहिट ऑफ  द वीक

श्रीमान जी दारू पीकर घर आए और श्रीमती जी की बातें ना सुनना पड़े लैपटॉप खोलकर काम करने का नाटक करने लगे
‘आज फिर पी कर आए हो’ श्रीमती जी ने पूछा
‘नहीं तो’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया
‘फिर अटैची खोलकर क्या टाइप कर रहे हो बेवड़े’ श्रीमती जी ने चिल्ला कर कहा।

 

सीएम सिंगल क्लिक से 29 को करेंगे 8 लाख 45 हजार विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » जीवन शैली » हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक…