
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और युद्ध की विभीषिका के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारत आने वाले 22 जहाज वर्तमान में फंसे हुए हैं। इन जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। फंसे हुए इन जहाजों में 6 जहाज लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस, 4 कच्चे तेल के टैंकर और एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस से लदा जहाज शामिल है। इतनी बड़ी मात्रा में ईंधन की आपूर्ति रुकने से घरेलू बाजार पर पडऩे वाले असर को देखते हुए विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय निरंतर निगरानी कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत इस समय खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के साथ-साथ ईरान, अमेरिका और इजरायल जैसे प्रमुख पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता अपनी ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही को बनाए रखना है। दरअसल, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की सुगबुगाहट के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अधिकांश व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग जीवन रेखा के समान है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में गैस आपूर्ति इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरती है।
Author: Jai Lok






