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13 मौतों के सन्नाटे में गूंज रहा सवालों का शोर, हादसे का दोषी कौन व्यवस्था या प्रकृति?

जबलपुर (जय लोक)।  बरगी बांध में 30 अप्रैल की शाम 6:15 तेज तूफान के दौरान डूब गए कू्रज के साथ ही 13 लोगों के जीवन समाप्त हो गए। अब वर्तमान में एक समय जो बरगी बांध के किनारे में सुकून भरी हवाएं चलती थीं वहां पर अब 13 मौतों के सन्नाटे में सवालों का शोर गूंज रहा है, दोषी कौन व्यवस्था या प्रकृति? निश्चित तौर पर यह प्राकृतिक आपदा तो थी लेकिन सवालों का भी अपना मुकाम है जो मजबूती से खड़ा है कि क्या ऐसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति से बचा जाया जा सकता था। 13 लोगों की मौत हुई है क्या इनको बचाया जा सकता था। सवाल बहुत सारे हैं, ये सवाल वाजिब भी हंै और तार्किक भी। इन सवालों के जवाब 13 लोगों का जीवन तो नहीं लौटा सकते लेकिन भविष्य में इस प्रकार की आपदा की स्थिति में लोगों की मौत होने से बचा जा सकता है।

क्या खराब था कू्रज का इंजन!
घटना के बाद से कई प्रकार की बातें सामने आ रही हैं। अब सवाल यह भी उठ खड़ा हुआ है कि डबल डेकर कू्रज बरगी बांध में समा गया इसका एक इंजन पहले से ही खराब था, हादसे के समय दूसरा इंजन भी फेल हो गया जिसके कारण आंधी की तेज हवाओं और तेज लहरों का मुकाबला कर यह किनारे तक का अपना रास्ता तय नहीं कर पाया। कू्रज के डूबने के बाद जीवित बचे मोहम्मद रियाज खान भी इंजन बंद हो जाने की गवाही दे रहे हैं। पर्यटन विकास निगम के जल क्रीड़ा के सलाहकार राजेंद्र निगम ने इस बात से साफ  इनकार किया और कहा कि दोनों इंजन चालू थे। हादसा अचानक 70 किमी की रफ्तार से चली हवाओं के कारण बड़ी-बड़ी लहरों की वजह से हुआ, जिसके कारण कू्रज के लोअर केबिन में पानी भरा गया।

मौसम विभाग की जानकारी पर सवाल?
मध्य प्रदेश पर्यटन के सलाहकार राजेंद्र निगम ने चर्चा के दौरान प्रेस को यह बताया कि स्थानीय मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिलने के कारण जलमार्ग पर सामान्य परिस्थितियों में निकले कू्रज और उस पर सवार यात्रियों के सामने खतरनाक स्थितियाँ उत्पन्न हो गईं। बाद में जो दुखद हादसे में तब्दील हुई। मौसम विभाग के विज्ञानी अरुण शर्मा का कहना है कि हम किसी के लिए अलग से अलर्ट जारी नहीं करते सभी संबंधित विभागों को मौसम की रिपोर्ट साझा कर दी जाती है इसी के आधार पर स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुरूप व्यवस्थाएं और निर्णय किए जाते हैं। वहीं पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहले सामान्य और फिर येलो अलर्ट की बात कही गई। इसी से जुड़ा एक सवाल और खड़ा हो रहा है कि येलो अलर्ट में यात्रियों से भरे कू्रज को पानी में क्यों उतारा गया? इसके बारे में यह कहा जा रहा है कि ऐसी स्थिति में संचालन प्रतिबंध नहीं होता मगर सावधानियां रखनी पड़ती हैं।

लाइफ  जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं?
हादसे के तत्काल बात से सबसे अधिक सवालों के शोर में यही सवाल शामिल है कि कू्रज में यात्रा के दौरान पर्यटकों को या यात्रियों को लाइफ  जैकेट पहनना अनिवार्य है या नहीं। इस सवाल के जवाब को लेकर अलग अलग तर्क सामने आये है। मध्य प्रदेश पर्यटन के सलाहकार राजेंद्र निगम ने कहा कि कू्रज में पर्यटकों के लिए लाइव जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं है। स्पीड बोट पैदल बोर्ड के लिए इसकी अनिवार्यता जरूर होती है। हम अंतर्राष्ट्रीय मानक और पर्यटन मंत्रालय के दिशा निर्देश का पालन करते हैं। इस बारे में कोई स्थानीय एसओपी मानक संचालन प्रक्रिया नहीं है। जब मौसम खराब होता है तो कू्रज का पायलट सभी यात्रियों को यह संदेश देता है की सुरक्षा की दृष्टि से सभी लोग लाइव जैकेट पहन लें। ठीक वैसे ही जैसे विमान पर ऑक्सीजन कम होने की स्थिति पर पायलट के द्वारा सूचना दी जाती है। यहां पर भी विभिन्न मतभेद हैं स्थिति बिगड़ गई उसके बाद पर्यटकों ने जान बचाने के लिए खुद ही लोअर डेक से जाकर लाइफ  जैकेट के बंडल निकाले और उन्हें पहनना प्रारंभ किया।
20 साल पुराने क्रूज की फिटनेस और समाप्त हो चुके बीमा पर सवाल?
2005-2006 के समय बरगी बांध के मैकल रिजॉर्ट से पर्यटन विभाग के द्वारा क्रूज का संचालन प्रारंभ किया गया था। सामान्य तौर पर यह 20 साल का हो चुका था। इतने पुराने जल वाहन की फिटनेस को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि इसका मेंटेनेंस कैसे और किन परिस्थितियों में अंतिम बार कब हुआ था? इसके साथ ही एक और सवाल उठ रहा है कि जिस क्रूज पर 41 लोग सवार होकर बरगी बांध में उतरे थे उस क्रूज का बीमा विगत 30 मार्च को ही समाप्त हो गया था। इस बारे में राज्य पर्यटन विकास निगम के एमडी डॉ इलैया राजा टी ने प्रेस से कहा कि इस बारे में तात्कालिक जानकारी उन्हें नहीं है रिकॉर्ड चेक करने के बाद स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी दूसरी और तकनीकी सलाहकार जल क्रीड़ा राजेंद्र निगम ने कहा कि मार्च में बीमा खत्म होने के पहले बीमा कंपनी को राशि का भुगतान कर दिया गया था इस संबंध में जरूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। लेकिन तकनीकी कारणों से राशि इंश्योरेंस कंपनी द्वारा लौटादी गई थी इसी वजह से बीमा रिन्यू नहीं हो पाया।
कैसे मिलेगा मृतकों को बीमा का मुआवजा?
हादसे में अपनी जान गंवाने वाले 13 लोगों के संबंध में अब बीमा कंपनी के समक्ष मुआवजे का दावा कैसे होगा? किस प्रकार से उसका भुगतान होगा? किस आधार पर मृतकों को दी जाने वाली राशि की गणना होगी? यह सभी सवाल खड़े हुए हैं। वॉटर स्पोर्ट्स एवं ऑपरेशन के जीएम अजय श्रीवास्तव का कहना है की मृतकों के परिजनों को क्लेम दिलाने के लिए दस्तावेज की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि बीमा रिन्यू नहीं होने के कारण जो स्थिति निर्मित हुई है उसके बाद बीमा कंपनी मृतकों को दी जाने वाली राशि के क्लेम को स्वीकार करेगी अथवा नहीं। इस संबंध में बीमा कंपनी से लगातार बातचीत चल रही है।

चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल – इलाज या फिर बिल भुगतान की माँग जायज?
हादसे में जीवित बचे लोगों के अनुभव बहुत ही दर्दनाक है। वाराणसी की रहने वाली सविता वर्मा ने जो अपने अनुभव साझा किये वो न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़े सवाल थे बल्कि जबलपुर की चिकित्सा व्यवस्था के मुंह पर भी बेशर्मी का करारा झापड़ है। सविता वर्मा ने कहा कि जब पानी से निकलने के बाद बचाव दल के लोग उन्हें किसी निजी अस्पताल में ले गए। अस्पताल में इलाज के बाद 50 लोगों ने सिर्फ उनका नाम पूछा पैसे गीले हो चुके थे मोबाइल बंद पड़े थे। लेकिन उसके बावजूद भी उन्हें 4700 का बिल पकड़ा दिया गया। दबाव डाला गया कि पहले इसका भुगतान करें। मजबूरी में उन्होंने वाराणसी में अपने भाई से ऑनलाइन पेमेंट करवाई और यह सवाल खड़े किए की क्या ऐसी स्थिति में चिकित्सा सुविधा देकर लोगों की जान बचाना ज्यादा जरूरी था या पैसे की वसूली करना ।

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Author: Jai Lok

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