
जबलपुर (जयलोक)। सडक़ों पर आवारा पशुओं का आतंक रोजाना पूरे देश में कई लोगों की जान लेता है। वैसे तो इसमें आवारा रूप से घूमने वाले गाय बैल, भैंस, सूअर, खच्चर भी शामिल हैं लेकिन सबसे अधिक खतरनाक हादसे का आंकड़ा आवारा कुत्तों के नाम पर है। शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। जिसका परिणाम है कि आवारा कुत्तों के आतंक से कई बच्चों की जान जा चुकी है, कई दो पहिया वाहन चालक गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, कई बुजुर्गों को इन्हीं आवारा कुत्तों के कारण अब अपना बचा हुआ जीवन बिस्तर पर गुजरना पड़ेगा। क्योंकि इन्हीं आवारा कुत्तों के हमले में उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें आई हैं ऐसे कई मामले जबलपुर के अलावा पूरे प्रदेश और देश में सामने आ चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कल देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी खतरनाक हो चुके या रेबीज ग्रस्त कुत्तों को मारने की इजाजत दे दी है। हालांकि इसके लिए नियमावली तैयार की जा रही है। जिसके अनुसार भविष्य में यह कार्रवाही संपादित होगी।

मीडिया रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि 6 साल में आवारा कुत्तों की संख्या जबलपुर शहर में दुगनी हो गई है। वर्तमान समय में अनुमानित रूप से इनकी संख्या 50 हजार के करीब आंकी जा रही है। साल में दो बार प्रजनन करने वाले कुत्तों की प्रजाति बहुत तेजी से विस्तार पाती है। आंकड़े यह भी बताते हैं कि जबलपुर के सरकारी अस्पतालों में जिनमें जिला अस्पताल विक्टोरिया, रांझी सरकारी अस्पताल, मेडिकल कालेज अस्पताल शामिल है प्रतिदिन औसतन डेढ़ सौ से 200 मामले आवारा कुत्तों के द्वारा काटे गए लोगों के सामने आते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा करते हैं हमला
पूरे देश भर में आवारा कुत्तों के व्यवहार और उनके स्वभाव पर कई रिसर्च हो चुकी हैं। पशु चिकित्सकों और पशु विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा किस्म के कुत्ते सबसे ज्यादा हमला 15 साल से कम उम्र के बच्चे और बुजुगोज़्ं पर करते हैं क्योंकि यह उन्हें कमजोर और आसान शिकार नजर आते हैं। पूरे देश भर में कई ऐसे मामले प्रकाश में आ चुके हैं जहां 10 साल से कम उम्र के बच्चों को आवारा कुत्तों के हमले में अपनी जान तक गवानी पड़ी है। कुछ समय पूर्व जबलपुर में हनुमान ताल क्षेत्र के पास भी ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा हो चुका है जिससे पूरे शहर की रूह कांप गई थी।


नगर निगम के पास क्या हैं इंतजाम
वर्तमान में नगर निगम प्रशासन के पास आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए कठौंदा क्षेत्र में एक डॉग शेल्टर होम निर्मित है जिसमें पूर्व की संख्या को बढ़ाते हुए अब यहां 75 नए पिंजरे और बढ़ा दिए गए हैं। पिजरों की कुल संख्या 140 के करीब हो गई है। यहां पर 35-40 कुत्तों के बधियाकरण की क्षमता है। यह उपाय उनकी संख्या को नियंत्रित करने का है। इसके साथ ही अनिवार्य रूप से इन कुत्तों को एंटी रेबीज के इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं। नगर निगम सूत्रों के अनुसार 20000 वर्ग फीट की जगह में डॉग शेल्टर होम का निर्माण भविष्य में होने की योजना तैयार की गई है। इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है। आवारा कुत्तों के बधियाकरण में सालाना तकरीबन 50 लाख रुपए का खर्च होता है जिसमें एक कुत्ते पर 950 रुपए का खर्च अनुमानित है।
Author: Jai Lok






