
जबलपुर (जयलोक)। शहर के गुरंदी बाजार को आज से 25 वर्ष पूर्व अतिक्रमणों से नगर निगम द्वारा मुक्त कराया गया था। इस गुरंदी बाजार को तत्कालीन आयुक्त रमेश थेटे ने अपनी जान की बाजी लगाकर खाली करने की कार्यवाही की थी। थेटे पर यहां प्राणघातक हमला किया गया था। लेकिन 25 वर्षों में खाली कराए गए गुरंदी बाजार में फिर अतिक्रमण काबिज हो गए। नगर निगम ने 25 वर्षों में गुरंदी बाजार के लिए किसी तरह की योजना बनाने की जरूरत नहीं समझी और गुरंदी बाजार को लावारिस छोड़ दिया गया है।

गुरंदीबाजार किसी समय में प्रदेश का सबसे बड़ा इतवारी बाजार रहा है जहां सुई से लेकर हर तरह का स ामान बिका करता रहा। इन सामानों में अस्त्र-शस्त्र भी शामिल रहा करते थे। शहर के बीचों-बीच गुरंदी बाजार करीब बेशकीमती 14 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें कबाडिय़ों का सबसे ज्यादा कारोबार होता है। वहीं बांस बल्ली का भी बड़ा कारोबार अभी भी यहां होता है। तत्कालीन आयुक्त रमेश थेटे ने बांस बल्ली बाजार और कबाडिय़ों के बाजार को आधे हिस्से में समेट दिया था और उन्हें नापकर जगह भी उपलब्ध करा दी गई थी। बाकी बचे 7 एकड़ के क्षेत्र में स्थाई बाजार के निर्माण की योजना भी रमेश थेटे द्वारा तैयार कराई जा रही थी लेकिन यह योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी।

गुरंदी बाजार का जो 7 एकड़ क्षेत्र पहले खाली कराया गया है उस पर नगर निगम को थोक बाजार बनाने की योजना क्रियान्वित करना चाहिए इसकी बड़ी आवश्यकता समझी जा रही है।
गुरंदी के आसपास गलगला, मुकदमगंज और भालदारपुरा तक थोक व्यापारियों का कारोबार संचालित है। यह ऐसे क्षेत्र हैं जो गलियों में है और इन गलियों वाले क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी गोदामें भी थोक व्यापारियों की संचालित हैं। सघन बस्तियों में सकरी गलियों में इन थोक व्यापार के कारोबारियों के यहां कभी अग्नि दुर्घटना हो जाए तो अग्निशमन वाहनों का पहुंचना भी मुश्किल है। इन क्षेत्रों में वाहनों के जाने की शुरुआत सराफा वाले मार्ग से गलगला होकर रहती है। जिससे सराफा बाजार का यातायात भी प्रभावित हो रहा है। सराफा व्यापारी कई बार यहां लगने वाले जाम का विरोध भी कर चुके हैं।
आज शहर के थोक व्यापारियों को गुरंदी जैसे शहरी क्षेत्र में बहु मंजिला दुकानों को बनाकर उनके कारोबार को व्यवस्थित किया जा सकता है। जिससे नगर निगम के राजस्व को भी एक बड़ा स्थाई लाभ हो सकता है। नगर निगम को गुरंदी बाजार में थोक व्यापारियों के लिए जगह उपलब्ध कराना चाहिए यह एक बड़ी जरूरत समझी जा रही है।

Author: Jai Lok







