
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने भारतीय वायुसेना के लिए 62000 करोड़ रुपये की लागत से 97 एलसीए मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी। इससे रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पहल को मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एलसीए मार्क 1ए, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक उन्नत स्वदेशी लड़ाकू विमान है, जो भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु में बना पहला एलसीए मार्क 1ए, 18 महीने की देरी के बाद सितंबर 2025 में वायुसेना को सौंपा जाएगा। एचएएल बेंगलुरु में प्रति वर्ष 16 और नासिक में 24 विमानों का उत्पादन कर सकता है। हालांकि, भारतीय वायुसेना एलसीए मार्क 1ए कार्यक्रम की धीमी प्रगति से चिंतित है, क्योंकि इससे युद्ध क्षमता पर असर पड़ सकता है। एचएएल ने अब तक 83 विमानों के ऑर्डर के लिए सात विमान बनाए हैं, जिनमें से एक में जीई का एफ404-आईएन20 इंजन लगा है।
जीई एयरोस्पेस ने मार्च 2025 में पहला इंजन एचएएल को सौंपा और आपूर्ति तेज करने का वादा किया। अमेरिकी कंपनी ने इंजन आपूर्ति में देरी के कारण बताए, लेकिन भारतीय ऑर्डर के लिए उत्पादन बढ़ाने का आश्वासन दिया। 2004 में एलसीए मार्क 1 के लिए एफ404-आईएन20 इंजन चुना गया था और 2016 तक जीई ने 65 इंजन आपूर्ति किए थे। ऑर्डर की कमी से उत्पादन लाइन बंद हो गई थी, लेकिन 2021 में 99 इंजनों के ऑर्डर के बाद जीई ने उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को फिर से शुरू किया। गौरतलब है कि फरवरी 2021 में वायुसेना ने 48000 करोड़ रुपये में 83 एलसीए मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर दिया था, लेकिन चार साल बाद भी इनकी डिलीवरी शुरू नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, पहले ऑर्डर का पहला विमान अक्टूबर 2025 में मिल सकता है। ये विमान पुराने मिग-21 का स्थान लेंगे। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना सितंबर 2025 में अपने अंतिम मिग-21 विमानों को सेवानिवृत्त करेगी, जिससे 62 साल का इतिहास खत्म होगा। यह समारोह चंडीगढ़ में आयोजित होगा। एचएएल की नासिक उत्पादन लाइन से पहला एलसीए मार्क 1ए जल्द ही अपनी पहली उड़ान भरेगा।
वायुसेना प्रमुख ने उठाये थे सवाल
मई 2025 में वायुसेना ने परियोजनाओं में देरी पर निराशा व्यक्त की। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि उन्हें कोई परियोजना समय पर पूरी होती याद नहीं। उन्होंने समयसीमा को बड़ी समस्या बताया। वायुसेना के पास 42.5 के बजाय केवल 30 स्क्वाड्रन हैं, जिससे क्षमता पर चिंता बढ़ी है। सिंह ने तत्काल सुधार की मांग की। फरवरी 2025 में उन्होंने एचएएल की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें कंपनी पर भरोसा नहीं है।
Author: Jai Lok







