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नहीं हो रहा प्रोटोकॉल का पालन ना मंत्री को सही स्थान ना महापौर को

निजी तौर पर लग रहे शासकीय कार्यक्रम के फ्लेक्स
जबलपुर (जय लोक)। एक बार फिर शासकीय कार्यक्रमों में लगने वाले फ्लेक्स का मामला चर्चा में आ गया है। शहर में कई स्थानों पर होने वाले आयोजनों में मंत्री एवं महापौर के फोटो लगाने और उनके नाम को स्थान देने में गफलतबाजी की जा रही है। संभागीय आयुक्त अभय वर्मा के निर्देश पर कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा सभी संबंधित शासकीय कार्यालय और विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि राजपत्र में प्रकाशित प्रोटोकॉल के अनुक्रम का पालन हर हाल में किया जाना है। लेकिन इसके बावजूद भी जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही मनमर्जी स्पष्ट रूप से शासकीय कार्यक्रमों में भी नजर आ रही है।
हाल ही में शहर आयोजित हुए कई मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के लोकार्पण कार्यक्रमों के दौरान प्रोटोकॉल के अनुसार नाम न दिए जाकर मनमर्जी से फ्लेक्स और पोस्टर बनाए गए। यह फ्लेक्स और पोस्टर निजी तौर पर बनाए जाना बताया जा रहा हैं वहीं कुछ स्थानों पर शासकीय विभाग के द्वारा भी कार्यक्रम में लगने वाले फ्लेक्स बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
नगर निगम ने बनाई है संजीवनी क्लिनिक
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का निर्माण करने के लिए नगर निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया। नगर निगम द्वारा संजीवनी क्लिनिक भवन का निर्माण करने के बाद इसे स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक का संचालन शासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाना है। लेकिन इसके निर्माण में नगर निगम की भी प्रमुख भूमिका है। क्योंकि नगर निगम ने संजीवनी क्लिनिक के निर्माण के लिए अपनी कीमती भूमि भी दी हुई हैं। इसके बावजूद भी ना तो नगर का
प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेता कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह को प्रोटोकॉल के हिसाब से बैनर में स्थान दिया गया यहां तक की उनके नाम का भी उल्लेख नहीं किया गया। दूसरी ओर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू का नाम भी प्रोटोकॉल की गरिमा के अनुसार नहीं दिया गया।
यह पूरा कार्य किसी के इशारे पर किसी जनप्रतिनिधि को खुश करने के लिए किया गया। इस बात की चर्चा जबलपुर के राजनीतिक हल्का में तेजी से सरगर्म हो चुकी हैं यहां तक की अब यह सारी बातें संगठन के माध्यम से भोपाल तक भी पहुंचने लगी हैं।
अग्रसेन वार्ड में हाल ही में आयोजित हुए मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के लोकार्पण समारोह में जो फ्लेक्स मंच पर लगा था उसे कुछ भाजपा के लोगों ने ही सोशल मीडिया पर वायरल कर यह सवाल उठाए हैं कि आखिर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर प्रोटोकॉल का मजाक उड़ाकर किस प्रकार से शहर में राजनीति की जा रही है।
यह बात तो स्पष्ट है कि वर्तमान में संस्कारधानी में सक्रिय भाजपा नेताओं के बीच की खींचतान जमकर करवट ले रही है और अपने चरम पर है। इस राजनीतिक को ठीक उसी तरीके से देखा जा रहा है जैसे गंजी में रखा दूध उबलता है और हर थोड़ी देर में उबाल अधिक आने पर वह बर्तन से बाहर गिर जाता है। इसी प्रकार भाजपा नेताओं के बीच मचा अंर्तद्वंद भी उबाल मार रहा है और रह रहकर बीच में बाहर निकल आता है इसके कारण इस पर सार्वजनिक चर्चाएंं शुरू हो जाती है।
आखिर किसकी शाह पर हो रही है अवहेलना, कार्यकर्ता पशोपेश में
भाजपा संगठन से जुड़े लोगों के बीच और भोपाल से लेकर जबलपुर तक के राजनीतिक गलियारों में इसी बात की चर्चा प्रमुख रूप से हो रही है कि आखिर जबलपुर की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने और जनप्रतिनिधियों को आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने, उनकी अवलेहना करने की जो होड़ मची है वह किसकी शह पर हो रही है। क्योंकि अपने से कद्दावर कद के किसी भी नेता को इस प्रकार से चुनौती देने का कार्य बिना किसी बड़ी ताकत के पीछे से समर्थन के संभव नहीं है। शहर भाजपा की राजनीति में तनाव पहले भी नजर आते थे लेकिन वर्तमान में जो परिस्थितियां सामने नजर आ रही हंै उसके कारण पार्टी के सामान्य और छोटे कार्यकर्ता बहुत असमंजस स्थिति में हैं। वह पार्टी का काम करना चाहते हैं लेकिन किसके नेतृत्व में करें किसका मुंह देखकर करें किसके समर्थन में करें किसे अपना नेता मानकर आगे बढ़े यह तय कर पाना उनके लिए बहुत कठिन हो गया है।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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