
जबलपुर (जयलोक) । कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा 43 करोड़ से अधिक के धान घोटाले को लेकर जो जाँच करवाई है और घपलेबाजों के खिलाफ जो कार्रवाही हुई है उससे हडक़ंप मचा हुआ है। कलेक्टर द्वारा कराई गई जाँच के बाद 16 राईस मिलर्स तथा 12 अधिकारियों कर्मचारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। कलेक्टर ने जिस स्तर पर जाँच करवाई है उसकी उम्मीद लोगों द्वारा नहीं की जा रही थी। लेकिन कलेक्टर के पूर्व के अनुभव का लाभ जबलपुर में हुए 43 करोड़ से अधिक के घोटाले को उजागर करने में मिला है। कलेक्टर का कहना है कि जिले के 46 मिलर्स की जाँच में 43 मिलर्स ने धान के परिवहन में अफरातफरी की है। यह अफरातफरी 43 करोड़ 20 लाख रूपये की निकली है। दोषी पाए गए 16 मिलर्स पर एफआईआर दर्ज हो चुक है। वहीं विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अब विभागीय जाँच भी कराई जाएगी। इस धान घोटाले में सरकारी अधिकारियों ने भी जमकर इन घपलेबाजों की मदद की है। कलेक्टर जबलपुर ने भोपाल से मिले निर्देशों के बाद जब 42 मिलर्स की जाँच हुई तब जिला आपूर्ति एवं खाद नियंत्रण नुजहत बकाई ने सभी घपलेबाज मिलर्स को क्लीनचिट दे दी। खाद्य नियंत्रक ने कलेक्टर जबलपुर से किसी तरह की मंजूरी क्लीनचिट देने के पहले नहीं ली तथा खुद ही मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन भोपाल को पत्र लिखकर मिलर्स से जुड़ी जानकारी दे दी। जिसमें उन्हें क्लीनचिट दी गई। जब यह मामला कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होंने एक बार फिर इस धान घोटाले की जाँच एसडीएम के स्तर पर करवाई। तब 43 करोड़ से ज्यादा का धान घोटाले में हुआ फर्जीवाड़ा भी सामने आया।

उज्जैन के एक दिन में लगे चार चक्कर
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने पूर्व में सिविल सप्लाई विभाग में किए गए कार्य के अनुभव का उपयोग जबलपुर में हुए धान के इस बड़े घोटाले में किया। कलेक्टर ने धान का परिवहन करने वाले वाहनों की जाँच टोल टैक्स नाकों पर भी कराई। उपार्जन केन्द्र से धान को मिल तक ले जाने और फिर उसे जमा करने के दौरान मिलर्स द्वारा जिन वाहनों की जानकारी दी गई थी वह फर्जी निकली। कलेक्टर दीपक सक्सेना उस समय आश्चर्य चकित रह गए जब उन्हें यह जानकारी मिली कि धान मिलर्स ने एक ही दिन में उज्जैन जैसे जबलपुर से दूरस्थ जिले में चार बार परिवहन किया है। जबकि उज्जैन से जबलपुर आने जाने में एक ट्रिप ही बड़ी मुश्किल से लग सकती है।

स्कूटर और ऑटो से भी हुई ढुलाई
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जब धान परिवहन में लगे वाहनों की जाँच बारिकी से कराई तो कई चौकाने वाली जानकारियाँ भी सामने आईं। मिलर्स ने धान परिवहन के लिए जिन वाहनो के उपयोग की जानकारी दी और इन वाहनों के नम्बर भी दिए तब यह चौकाने वाली जानकारी सामने आई कि इन वाहनों के नम्बर स्कूटर, ऑटो और चार पहिया वाहन वाले वाहनों के थे। इससे यह समझ में आ गया कि किस स्तर पर धान के परिवहन में घोटाला किया गया।

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Author: Jai Lok







