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राजस्व अधिकारियों को बनाया जा रहा प्रयोगशाला, विधानसभा में पेश हुआ ध्यानाकर्षण प्रस्ताव

भोपाल (जयलोक)। मध्यप्रदेश विधान सभा में राजस्व विभाग को दो भागों न्यायिक एवं गैर न्यायिक में विभक्त किये जाने के विरोध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया गया है। यह ध्यान आकर्षण प्रस्ताव विधायक सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा ने पेश किया है।अपने ध्यान आकर्षण प्रस्ताव विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने इस बात की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है कि मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग के वीडियो कांफ्रेंस दिनांक 11 जून को प्रोसिडिंग के क्रियान्वयन हेतुप्रमुख राजस्व आयुक्त भोपाल द्वारा कुछ जिला कलेक्टरों को पत्र क्रमांक 5235 दिनांक 10/07/2025 से एकजन विरोधी, किसान विरोधी परिपत्र जारी कर राजस्व विभाग को दो भागों में विभक्त किया गया है जो कानूनविरोधी है। यह भू-राजस्व संहिता के वर्णित प्रावधानों के विपरीत है। राजस्व आयुक्त के दिनांक 10/07/2025 के पत्र के अनुसार राजस्व अधिकारियों के बीच न्यायिक एवं गैर न्यायिक कार्य विभाजन किया गया है जो किसी भी दृष्टिकोण से न तो व्ययहारिक है और न हीविधि अनुसार है।
शासन द्वारा तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों के भर्ती के नियम बनाये हैं कार्यपालिक पदों परपदस्थ अधिकारियों से गैर न्यायिक कार्य कराना इस तरह का तुगलकी आदेश जारी कर राजस्व के अधिकारियोंको प्रयोग शाला बनाया जा रहा है जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कार्यपालिका द्वारा विधायिका केअधिकारों पर अतिक्रमण किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय एवंवरिष्ठ राजस्व न्यायालय / ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेशों का क्रियान्वयन फील्ड में तहसीलदार ही करवाता है,जो इस आदेश से संभव नहीं है. राजस्व न्यायालय के मूल ढांचे को ध्वस्त किया जा रहा है इस तरह के तुगलकीआदेश से नामान्तरण, बटवारा सीमांकन, सीमा विवाद, रास्ता विवाद अतिक्रमण, प्राकृतिक आपदा के प्रकरणोंका निपटारा नहीं हो सकेगा।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में लिखा गया है कि उक्त तुगलकी आदेश द्वारा परिवर्तन कर म0 प्र0 भू-राजस्व संहिता 1959 कीधारा 11,19, 24 एवं अन्य सुसंगत अधिनियमित कानूनों, सेवा भर्ती नियमों में विधिक संशोधनों के बिनातहसीलदार स्तर के राजस्व अधिकारियों को न्यायिक एवं गैर न्यायिक में बुनियादी संसोधनों के अभाव मेंविभाजन करके निरन्तर बढ़ती जनसमस्या के दृष्टिगत न्यायालयों के विकेंद्रीकरण द्वारा सुलभ एवं त्वरित न्यायकी आवश्यकता की पूर्ति न होने से आम नागरिकों, जन प्रतिनिधियों, कृषकों में भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।इस लोक महत्व के विषय पर सदन एवं शासन का ध्यान विधायक सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा ने अपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में आकृष्ट कराया है।

 

प्रदेश और जबलपुर में रहने वाले अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की जानकारी विधानसभा में माँगी गई

Jai Lok
Author: Jai Lok

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