
जबलपुर, (जयलोक)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में घिर गया है। बच्चा बदलने की गंभीर घटना ने पूरे अस्पताल में हडक़ंप मचा दिया है। यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है लेकिन इतनी बड़ी गलती हो जाने के बावजूद भी उनको सजा न दिए जाना वरिष्ठ अधिकारियों कार्यों प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर इनका संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
पीडि़त धर्मेन्द्र बर्मन और पत्नी सुनीता बर्मन को शनिवार के दिन लडक़ी हुई थी। आज उसकी मृत्यु हो गई थी। इसी प्रकार एक नवजात बच्चे की भी मौत हुई थी और डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इन दोनों के शव अस्पताल कर्मियों की लापरवाही से बदल गये थे। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनकी संतान को बदल दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस नवजात को उनका बच्चा बताया गया, उसे दो दिन बाद मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, असली बच्चे को बदलने का आरोप परिजनों और स्थानीय लोगों ने लगाया है। घटना के सामने आते ही कांग्रेस नेता अभिषेक पाठक ने इस मुद्दे को वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सकों के सामने उठाया। पाठक ने कहा कि यह घटना अस्पताल प्रशासन की नाकामी और लापरवाही का शर्मनाक उदाहरण है। बच्चा बदलना और फिर मौत की घोषणा करना किसी अपराध से कम नहीं। दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यदि सरकार और प्रशासन चुप रहा तो कांग्रेस सडक़ पर उतरकर आंदोलन करेगी। अभिषेक पाठक ने पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग करते हुए कहा कि दोषियों पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होना चाहिए।

इधर, घटना सामने आने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बाद पुलिस और प्रशासन को मौके पर पहुँचना पड़ा।

अस्पताल प्रबंधन ने जाँच कमेटी गठित करने की बात कही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह की घटनाएँ बार-बार हो रही हैं, जिससे जनता का विश्वास डगमगा गया है। ऐसे मामले में दोषियों को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए।

Author: Jai Lok







