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स्मार्ट मीटर पर कंपनी का पक्ष भ्रामक – शर्मा, असल सवाल ठेका कंपनी विदेशी मूल की है या नहीं

जबलपुर, (जयलोक)। स्मार्ट मीटर के डाटा को लेकर उठ रहे सवाल पर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जारी किये गये बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति उठाते हुये कहा है की कंपनी का यह बयान उपभोक्ताओं की आंख में पर्दा डालने का प्रयास है. बिजली कंपनी का पक्ष भ्रामक है. कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा है की सवाल यह नहीं है की उसका डाटा भारत में सुरक्षित है. सवाल यह है कि कंपनी विदेश मूल की है या नहीं. सौरभ शर्मा ने कहा है की कंपनी ने अपने बयान में बार-बार यह कहा कि भारत में डाटा सुरक्षित है। परंतु यहाँ सवाल भारत की नहीं, बल्कि उस कंपनी की पृष्ठभूमि का है, जिसके विदेशी मूल और पाकिस्तानी मूल के कर्मचारियों की संलिप्तता को लेकर शंका व्यक्त की जा रही है। उदाहरणस्वरूप, आज भी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पाकिस्तानी मूल के निवासी इस कंपनी में कार्यरत हैं। अत: केवल भारत में डाटा सेंटर कह देने से उपभोक्ताओं की चिंताएँ समाप्त नहीं होतीं।
इंदौर में आयोग्य क्यों घोषित की गई कंपनी -कंपनी ने यह बताने की कोशिश की कि इंदौर में अल्फ़ानार केवल समय पर स्पष्टीकरण न दे पाने के कारण अस्वीकृत हुई। जबकि सच्चाई यह है कि मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्वयं तीन बार नोटिस जारी किए और पर्याप्त अवसर दिए। इसके बावजूद जब दस्तावेज़ अपूर्ण पाए गए तो कंपनी को अयोग्य घोषित किया गया। यदि वही दस्तावेज़ उस समय अधूरे थे, तो बाद में उसी कंपनी को अन्य क्षेत्रों में ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) कैसे दे दिया गया – यह गंभीर प्रश्न है, जिस पर जनता को स्पष्ट जवाब चाहिए।
दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया जाए-कांग्रेस की यह मांग है कि जिन दस्तावेज़ों और योग्यताओं के आधार पर अल्फ़ानार को इंदौर में अयोग्य घोषित किया गया और पूर्व एवं मध्य क्षेत्र में योग्य घोषित किया गया, वे सभी दस्तावेज़ तथा पात्रता मानदंड जनता के सामने सार्वजनिक किए जाएं। पारदर्शिता ही उपभोक्ताओं का विश्वास बहाल कर सकती है।कांग्रेस तकनीक के विरोध में नहीं है, लेकिन तकनीक के नाम पर नियमों की अनदेखी, विदेशी कंपनियों को विशेष संरक्षण और उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कांग्रेस का यह स्पष्ट कहना है कि उपभोक्ताओं की आँखों पर पर्दा डालने और सत्य को छिपाने की कोशिशें बंद होनी चाहिए। यदि सरकार और बिजली कंपनी के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उन्हें पूरे दस्तावेज़ और निर्णय प्रक्रिया को सार्वजनिक कर पारदर्शिता साबित करनी चाहिए।
यही लोकतंत्र और उपभोक्ता अधिकारों की असली कसौटी है।

 

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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