
जबलपुर (जय लोक)। जबलपुर शहर में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था इतनी बेहतर हो गई है कि यहां रहने वाले आम लोगों और व्यापारियों को इस बात का एहसास हो रहा है कि वह गांव से भी बत्तर बिजली व्यवस्था के बीच में रह रहे है।

खराब हो रहे बिजली उपकरण कौन है जिम्मेदार
विद्युत आपूर्ति की इतनी बुरी व्यवस्था तो भाजपा शासन के 20 साल में कभी नजर नहीं आई। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई बार बिजली व्यवस्था टापू होने से और दोबारा अधिक वोल्टेज के साथ वापस आने के कारण सैकड़ो घरों के विद्युत उपकरण जिम महंगे महंगे टीवी फ्रिज एक लाइट आदि शामिल है खराब हो चुके हैं लेकिन इस बात की जिम्मेदारी लेने कोई आगे नहीं आता। इस नुकसान की भरपाई कौन भरेगा आखिर जनता में यह आक्रोश किसकी गलती के कारण पनप रहा है।

भाजपा सरकार की छवि खराब कर रही डगमगा चुकी विद्युत सप्लाई व्यवस्था
वर्तमान में इतनी बुरी स्थिति है कि बिजली की आपूर्ति एक दिन में दर्जनों बार बंद हो रही। आम जनता के साथ-साथ शहर की व्यापारी बहुत अधिक परेशान है। बिजली बिल वसूली के नाम पर उनके ऊपर सख्ती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है।


जिम्मेदार उठाते नहीं फोन, जूनियर इंजीनियर के पास नहीं होता सही जवाब
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लगातार फेल होती जा रही विद्युत वितरण की व्यवस्था और लगातार बार-बार दिन में कई बार अवरोध हो रही बिजली सप्लाई लेकिन विषय पर आम जनता और व्यापारी विद्युत मंडल के बड़े अधिकारियों को फोन लगाते रहते हैं लेकिन उनके फोन नहीं उठाते। उनके फोन उठाते हैं वह बता देते हैं कि वह लोग बैठक में व्यस्त है। फील्ड पर मौजूद रहने वाले जूनियर इंजीनियर के नंबर बिल पर जरूर दिए रहते हैं लेकिन विद्युत व्यवस्था ठपप पड़ जाने पर वो फोन उठाना बंद कर देते हैं। उनको सही फाल्ट की जानकारी नहीं रहती हो और ना ही इस बात की जानकारी रहती है कि बिजली सुधरने में कितना समय लगेगा। सबसे बुरी स्थिति तो तब निर्मित होती है। जब उनके कारण शहर की सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को भी बे जवाब होना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों का मौन, मनमानी पर उतारू प्राइवेट कंपनी
बड़ी विडंबना है कि शहर में एक से एक सक्षम जनप्रतिनिधि मौजूद है लेकिन अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए कोई भी विद्युत मंडल के खिलाफ जमीन पर नहीं उतर रहा। सिर्फ पूर्व विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ही एक मात्र ऐसे व्यक्ति है जो विद्युत मंडल कंपनियों की व्यवस्थाओं के खिलाफ मुखर दिखते हैं। सत्ता पक्ष के विधायकों को शायद जनता की समस्याओं पर आवाज उठाते हुए विद्युत मंडल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बोलने की अनुमति ऊपर से नहीं है इसलिए कितना भी परेशानी का माहौल बन जाए लेकिन सत्ता पक्ष के विधायक इस बारे में कुछ नहीं कहते।
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Author: Jai Lok






