
जबलपुर (जयलोक)। हिंदू धर्म में किसी शुभ कार्य की शुरूआत करने के लिए शुभ और अशुभ समय का विशेष ख्याल रखा जाता है। इन समयों में पंचक का नाम प्रमुखता से लिया जाता है जब ज्योतिषाचार्य पंचक के समय शुभ कार्यों की मनाही करते हैं। अक्टूबर महीने में यह पंचक दो बार लगने जा रहा है। अक्टूबर में दो बार पडऩे वाले पंचक में शुभ कार्य पर बे्रक लग जाएगा। अक्टूबर में पंचक की पहली तिथि 3 से 8 अक्टूबर है तो दूसरी तिथि 31 अक्टूबर से चार नवंबर तक रहेगा।
ज्योतिषाचार्य का कहना है किदोनों बार ही इस पंचक की शुरुआत शुक्रवार के दिन हो रही है। पहला पंचक शुक्रवार 3 अक्टूबर से शुरू हो गया है जो 8 अक्टूबर तक जारी रहेगा। रविवार के दिन शुरु हुआ रोग पंचक, सोमवार को प्रारंभ होने वाला राज पंचक और मंगलवार के दिन प्रारंभ होने वाला अग्नि पंचक और शनिवार के दिन शुरू होने वाला मृत्यु पंचक कहलाता है। ये सभी पंचक अपने अलग-अलग फल को प्रदान करते हैं।

नवंबर-दिसंबर भी रहेगा पंचक
अक्टूबर के बाद नवंबर और दिसंबर में भी पंचक का प्रभाव बनेगा। पंचाग के अनुसार नवंबर में 27 तारीख से पंचक शुरू होंगे तो वहीं दिसंबर में 24 दिसंबर से प्रारंभ होंगे। इन दोनों तारीखों में पंचक शुरू होने से लेकर खत्म होने तक शुभ कार्य नहीं होंगे।

ये कार्य रहेगे वर्जित
पंचक में विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, नया वाहन या सोना-चांदी खरीदना, दक्षिण दिशा की यात्रा, घर की छत ढलवाना और लकड़ी का सामान बनवाने या इक_ा करने जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं। कहते हैं कि पंचक में ये कार्य करने से धनहानि, घर में क्लेश और अन्य अनिष्ट हो सकता है। इसके अलावा, चोर पंचक में नया कारोबार या निवेश करने और दाह संस्कार से पहले विशेष अनुष्ठान करने की भी मनाही है।

पंचक के दोष से बचने का उपाय
सनातन परंपरा में तमाम चीजों के लिए जहां कुछेक जरूरी नियम बनाए गये हैं, तो वहीं परिस्थितियों के चलते यदि उनके पालन करने में समस्याएं आएं तो उसका उपाय भी बताया गया है। जैसे पंचक के दौरान यदि घर में लकड़ी लाना बेहद जरूरी हो तो इसके दोष से बचने के लिए व्यक्ति को शिवालय में आटे का पंचमुखी दीया जलाना चाहिए। अगर पंचक में दक्षिण दिशा में जाना जरूरी हो तो व्यक्ति को हनुमान जी को पांच तरह का भोग लगाकर यात्रा पर निकलना चाहिए। पंचक में अगर छत ढलवाना पड़ जाए तो व्यक्ति को काम करने वालों को मिठाई खिलाकर इसके दोष से बचना चाहिए। सबसे खास बात अगर पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो आटे के पुतले बनाकर विशेष पूजा करनी चाहिए।
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Author: Jai Lok







