
जल-वायु प्रदूषण अधिनियम को ताकपर रख पास हो रहे नक्शे
जबलपुर (जयलोक)। हाल ही में कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देश पर अवैध कालोनियों पर कार्रवाई के बाद अब वैध कालोनियों में बड़ा गड़बड़झाला प्रकाश में आया है। बगैर आवासीय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा कालोनियों के मानचित्र जारी किए जा रहे हैं। इस पर मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी सख्त रुख अपना सकता है। कालोनी बनाने से पहले जल-मल ट्रीटमेंट के लिए नक्शे में आवासीय एसटीपी के लिए जगह तथा प्लांट का क्रियान्वयन आवश्यक है। मगर बिल्डर्स के स्वीकृत नक्शों में एसटीपी का जिक्र ही नहीं किया जा रहा है। नक्शे के साथ जारी एनओसी पत्र में टीएंडसीपी विभाग सिर्फ यह लिखकर अपने दायित्व की पूर्ति कर रहा है कि प्रदूषण विभाग से अनुमति ली जाए और एसटीपी आवश्यक रूप से लगाई जाए।

जिला प्रशासन भी सतर्क नहीं
दरअसल कालोनी बनाने से लेकर उसके लिए बने नियमों का पालन करवाना जिला प्रशासन और नगर निगम का दायित्व है मगर इतना बड़ा गड़बड़झाला चल रहा है। एक सर्वे के अनुसार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों वैध कालोनियों में निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं हो रहा है।

पहले अनुमति फिर प्रदूषण की एनओसी का खेल
देखने में आ रहा है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण 1974 एवं 1981 में लाए गए कानूनों का स्वयं उल्लघंन कर रहा है। नियमानुसार विभाग को नक्शे पास करते समय एसटीपी अथवा जल-मल प्रबंधन से संबंधित व्यवस्था का आवश्यक रूप से ध्यान रखना चाहिए मगर यह खुला खेल एक सोची-समझी मिलीभगत से चल रहा है।

कब आया कानून
जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1974 में लागू हुआ। जिसका मुख्य उद्देश्य देश में जल प्रदूषण को रोकना, नियंत्रित करना और उसकी स्वच्छता बनाए रखना प्रमुख है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्तियाँ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हैं। इसी प्रकार वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम, 1981-1981 में अधिनियमित किया गया और 29 मार्च, 1981 को लागू हुआ। लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
Author: Jai Lok







