
जबलपुर तहसीदार ने पुलिस को लिखा एफआईआर और बार एसोशिएशन को कार्यवाही के लिए पत्र

जबलपुर जय लोक।

जबलपुर तहसील में आज दोपहर एक अधिवक्ता ने पेशे की सभी मर्यादाओं को तोड़ते हुए न्यायालय में चल रही कार्यवाही के विरोध में अनाप-शनाप तरीके विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान अधिवक्ता ने संविदा कर्मचारी एक मुस्लिम कंप्यूटर ऑपरेटर को इंगित करते हुए भी अनर्गल आरोप लगाए एवं कोर्ट की मर्यादा को भंग किया।
तहसीलदार प्रदीप तिवारी रोजाना की तरह न्यायालय में प्रकरणों की सुनवाई कर रहे थे दोपहर बाद अधिवक्ता की वेशभूषा में एक व्यक्ति न्यायालय में आया और उसने अभद्रता करते हुए चिल्लाना शुरू कर दिया।
पंचनामा रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है जिसमें तहसीलदार प्रदीप तिवारी ने कहा है कि तकरीबन अपरांह 12:55 बजे में न्यायालय में बैठकर सुनवाई कर रहे थे। इसी बीच एक व्यक्ति वकील की वेशभूषा में न्यायालय रूम में दाखिल होकर जोर से चिल्लाते हुये आया मेरे द्वारा यह पूंछने पर कि क्या हो गया तो बोला गया कि मैं बार का सचिव यशवंत दुबे हूँ, आपके द्वारा मेरा नामान्तरण प्रकरण जय बाबा जनकल्याण समिति का क्यों निरस्त कर दिया गया। तब रीडर से उक्त प्रकरण की फाइल मगाँकर अवलोकन उपरांत बताया गया कि पटवारी रिपोर्ट एवं राजस्व अभिलेख में विक्रेता/अनावेदक का नाम दर्ज नहीं होने तथा प्रस्तुत तमलीकनामा एवं सेटलमेंट डीड वर्ष 1997 की पंजीकृत होने तथा छायाप्रति संलग्न होने के कारण प्रकरण विधि अनुसार निराकृत किया गया है, तभी तैश में आकर पुनः जोर से चिल्लाते हुये कहने लगे कि बगल में मुस्लिम लड़का बैठाकर धर्म विरोधी कार्य करते हो, इसी बीच हमारे रीडर को भी धमकाया गया।

उक्त व्यक्ति की आक्रामकता को देखते हुये जब मैं वीडियों बनाने लगा तो अधिवक्ता श्री दुबे द्वारा अनर्गल वेबुनियादी पैसे मांगने का आरोप लगाते हुये वीडियों बनाने लगा, इस प्रकार से अधिवक्ता श्री यशवंत दुबे द्वारा गुडांगर्दी करते हुये शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न कर धार्मिक भावनाओं को भड़काया गया तथा न्यायालय की गरिमा एवं अवमानना की गई।
तहसीलदार श्री तिवारी ने कहा कि किसी भी न्यायालय में अगर प्रकरण के संबंध निर्णय आता है और कोई भी पक्षकार उससे संतुष्ट नहीं है तो उसके पास उनके न्यायालय से उच्च न्यायालय में जाने का अधिकार स्वतंत्रता है। लेकिन इस प्रकार से धमकाये जाना , भय का माहौल बनाना अनुचित है। हमने इस बात की जानकारी जिला कलेक्टर को भी दी है साथ ही पुलिस को भी पत्र लिखकर प्रकरण दर्ज करने एवं न्यायालय में हंगामा करने पर कार्यवाही करने हेतु कहा है इसके साथ ही बार एसोसिएशन के पदाधिकारी को भी पत्र के प्रेषित कर पूरी घटना से अवगत करवाया गया है एवं उचित कार्यवाही की मांग की गई है।
अधिवक्ता न्यायालय के अभिन्न अंग होते हैं लेकिन नियम विरूद्ध और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही कार्यवाही की जाती है अनुचित कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जाना उचित नहीं है।
वीडियो हुआ वायरल
पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो वहां मौजूद किसी व्यक्ति द्वारा बना कर वायरल किया गया है। जिसमें साफ तौर पर वकील द्वारा न्यायालय में की जा रही अभद्रता नजर आ रही है।
वकील यह कहते हुए नजर आ रहे कि उन्हें पेशी की तारीख 5 को दी गई थी और 2 तारीख को निर्णय हुआ जबकि न्यायालय के बाबू का कहना था कि ऐसा नहीं है। नामांतरण प्रकरण को निरस्त करने की प्रक्रिया दस्तावेजों के आधार पर की गई है।
Author: Jai Lok







