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स्कूलों से फीस वसूली मामले में हाईकोर्ट की रोक , किसी स्कूल को नहीं लौटाने पड़ेंगे फीस के पैसे

जबलपुर (जयलोक)। मध्य प्रदेश के स्कूल संचालकों को उच्च न्यायालय की युगलपीठ से बड़ी राहत मिली है। जबलपुर प्रशासन के आदेश को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर शक्ति का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने इसी आधार पर निजी स्कूलों से फीस वापस कराने से जुड़ा आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन का यह हस्तक्षेप कानून की सीमाओं का उल्लंघन है।
स्कूलों द्वारा वसूली गई अधिक फीस को लौटाने के लिए जबलपुर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाही करते हुए पूर्व में आदेश जारी किए थे। सूत्रों के अनुसार तकरीबन पाँच सौ करोड़ रूपये की राशि दर्जनों स्कूलों को अभिभावकों को वापस करने के आदेश हुए थे। इस आदेश को जबलपुर के दो दर्जन से अधिक निजी स्कूलों जिनमें से अधिकांश मिशनरी स्कूल हैं ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

जिला प्रशासन का तर्क था कि नियमविरूद्ध तरीके से निजी स्कूल संचालकों ने मनमानी कर अधिक फीस वसूल की है। इस मामले में स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों और प्राचार्यों की गिरफ्तारी तक हुई थी, जिससे यह मामला प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सुर्खियों में आ गया था। स्कूल संचालकों ने इन कार्रवाहियों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसमें यह तर्क दिया गया कि प्रशासन ने कानून से परे जाकर स्कूलों के प्रबंधन में सीधा दखल दिया।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान और अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि फीस तय करना और स्कूल संचालन से जुड़े निर्णय स्कूल मैनेजमेंट या सोसाइटी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। कोर्ट ने यहां तक टिप्पणी कर दी कि यदि किसी अभिभावक को निजी स्कूलों की फीस अधिक लगती है तो वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल क्यों नहीं कराते। युगलपीठ ने माना कि इस पूरे मामले को 2017 के अधिनियम और 2020 के नियमों के तहत बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता था।

न्यायालय ने मध्य प्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन की आपत्ति को भी खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि संगठन अपने रजिस्ट्रेशन और सदस्यों का विवरण देने में विफल रहा।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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