
जबलपुर (जयलोक)। देश में धर्म परिवर्तन को लेकर घटित हो रही घटनाओं को लेकर द्वारकापीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी सरस्वती ने यह प्रश्न उठाया है कि धर्म परिवर्तन करने वाले आखिर क्या प्राप्त करना चाहते हैं?

क्या जिन्होंने धर्म परिवर्तन किया है उन्हें अपने धर्म में वह नहीं मिला जहां वे थे इसलिए उन्होंने धर्म परिवर्तन किया या यह माना कि वे जिस धर्म में है वह ठीक नहीं है इसलिए वह धर्म परिवर्तन कर रहे हैं।

यह तो ऐसा ही है कि व्यक्ति जिस मकान में रहता है वह मकान यदि ठीक नहीं होता है तो वह दूसरा मकान या फ्लैट लेता है यह घर तभी आप लेते हैं जब आपको वह घर पसंद ना हो जिसमें आप यह रहे हैं। इसीलिए लोग दूसरा घर लेना चाहते हैं।

शंकराचार्य जी ने कहा कि जब लोग धर्म परिवर्तन करते हैं तो या तो वे किसी स्वार्थ से या लोभ से धर्म परिवर्तन करते हैं। सिद्धांत के आधार पर धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता क्योंकि धर्म के माता-पिता हैं धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति अपने माता-पिता के धर्म को कैसे त्याग सकता है। यह माता-पिता के धर्म को छोडक़र धर्म परिवर्तन करने वालों को यह विचार करना चाहिए कि जिस धर्म में आपका जन्म हुआ है तो उसमें यदि आपको सुख नहीं मिला है तो दूसरे धर्म को परिवर्तित कर लेने से उस धर्म में सुख मिलेगा इसकी कौन गारंटी लेता है। इसीलिए धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहिए।
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Author: Jai Lok







