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मेडिकल बना कैदियों की आरामगाह कैदियों की निगरानी पर उठ रहे सवाल, मेडिकल अस्पताल में कैदियों के हाथों में पहुँच रहे मोबाईल, गवाह को धमकाने की हुई शिकायत

जबलपुर (जय लोक)। नेताजी सुभाषचंद्र बोस सुपर स्पेशलिटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कैदियों को इलाज की सुविधा मानों उनके लिए आरामगाह जैसी हो गई है। जितना पैसे वाला अपराधी होता है उसको उतनी हाई फाई सुविधा मिलती है। इसकी आड़ में कैदियों को कई गैर जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। जिनमें एक मोबाईल फोन का उपयोग भी शामिल है। जिसका एक मामला उस वक्त सामने आया जब आदिवासी महिला की जमीन हड़पने जैसे गंभीर अपराध में सजा काट रहा पन्ना जिले का आरोपी इलाज के नाम पर अस्पताल में भर्ती होकर मोबाइल के जरिए फरियादी पक्ष और गवाहों को धमकाने लगा। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और बंदी की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पन्ना पुलिस के पत्र से हुआ खुलासा

इस पूरे मामले का खुलासा पन्ना पुलिस द्वारा केंद्रीय जेल अधीक्षक जबलपुर को भेजे गए एक पत्र से हुआ है। पत्र में बताया गया है कि आरोपी श्रीकांत दीक्षित पिता स्वर्गीय भास्कर दीक्षित, निवासी टिकुरिया मोहल्ला पन्ना, थाना कोतवाली पन्ना में दर्ज अपराध क्रमांक 824/25 के तहत न्यायिक अभिरक्षा में है। आरोपी के खिलाफ  धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र सहित भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।

गिरफ्तारी के बाद भी अस्पतालों का चक्कर

पुलिस के अनुसार आरोपी को 15 जनवरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। गिरफ्तारी से पहले भी आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जिला अस्पताल पन्ना में भर्ती रहा। वर्तमान में वह नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के कार्डियो सुपर स्पेशलिटी वार्ड-06, दूसरी मंजिल में भर्ती है।

मोबाइल से गवाहों को धमकाने का आरोप

पन्ना पुलिस ने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में होने के बावजूद लगातार मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा है। इसी मोबाइल के माध्यम से वह फरियादी पक्ष और गवाहों को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है, जिससे मामले की विवेचना प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

पुलिस पहरे पर भी उठे सवाल

मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि न्यायिक अभिरक्षा में बंद आरोपी के पास मोबाइल फोन आखिर पहुंचा कैसे। आरोपी की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा बरती गई लापरवाही को लेकर उनकी भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।

जेल प्रबंधन ने कहा कि पुलिस लाइन के कर्मी सुरक्षा में

दूसरी ओर जेलर मदन कमलेश का कहना है कि जिस आरोपी की सुरक्षा में पुलिस जवान तैनात है वे जवान जेल के पुलिसकर्मी नहीं हैं बल्कि पुलिस लाइन के पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में तैनात किया गया है। जेलर मदन कमलेश का कहना है कि अभी जेल के पाँच कैदी मेडिकल में भर्ती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए जेल के पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं जेल प्रबंधन की ओर से मेडिकल में भर्ती कैदियों को इस तरह की सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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