
जबलपुर (जयलोक)। चिकित्सा के क्षेत्र में जबलपुर में एक और मुकाम स्थापित हुआ है। पहले सिर्फ विदेशों में चर्म रोग के लिए एक इंजेक्शन उपलब्ध होता था। भारत में ना तो इसका निर्माण होता था ना ही इसके प्रयोग की अनुमति थी। प्रदेश में पहली बार जबलपुर के ओजस क्लिनिक में चर्म रोग के जाने माने डॉक्टर हितेश लोकवानी ने भारत में निर्मित होने लगे इस महत्वपूर्ण इंजेक्शन का प्रयोग अपने एक मरीज पर सफलता पूर्वक किया। उक्त मरीज मूलत: जबलपुर के रहने वाले हैं लेकिन विगत कुछ वर्षों से वे जर्मनी में नौकरी कर रहे थे। उन्हें गंभीर रूप से सायरोसिस की बीमारी है। जिसके कारण उनके शरीर में दाग या चिकत्ते उभरने लगते थे और इसमें जलन खुजली और दर्द समस्या बनी रहती थी। विदेशों में इस प्रकार की बीमारी के इलाज के लिए एक ऐसा उच्च गुणवत्ता वाला इंजेक्शन दवा के रूप में उपलब्ध होता है जो कि बायोलॉजिकल तरीके से स्किन की सतह पर कार्य कर इस प्रकार की बीमारी में राहत देता है।

4 से 6 माह तक रहता है असर
डॉक्टर हितेश लोकवानी ने बताया कि पहले इस दवा का निर्माण भारत में नहीं होता था और विदेश से इसे आयात करने पर प्रतिबंध था। कुछ समय पहले ही इस इंजेक्शन का निर्माण भारत में प्रारंभ हो गया है। डॉ. लोकवानी ने बताया कि यह दवा चमड़ी की ऊपरी सतह पर इंजेक्शन के रूप में लगाई जाती है। डॉ. श्वेता लोकवानी ने बताया कि मरीज पर इस इंजेक्शन का असर 4 से 6 महीने तक रहता है। इस लंबे अंतराल में मरीज को बीमारी से होने वाली परेशानियों से निजात मिल जाती है।

दवा लगाने और खाने से राहत मिलती है
आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के अंतर्गत निर्मित हुए इस इंजेक्शन का असर सयरोसिस से पीडि़त मरीजों को काफी लाभ पहुंचता है। इस दौरान मरीजों को ना तो नियमित रूप से दवाई खाने की जरूरत पड़ती है और ना ही किसी प्रकार की दवाई जख्म पर लगाने की जरूरत पड़ती है वह पूर्ण रूप से सामान्य दिनचर्या के साथ अपना जीवन जी सकते हैं। यहां तक की इस दवाई के उपयोग से उनकी त्वचा सामान्य रूप में भी आ सकती है।

दवा खराब सेल पर काम करती है
डॉ. लोकवानी ने बताया कि यह दवा मुख्य रूप से शरीर के उन खराब सेलों को सुधार करने पर कार्य करती है जिसके कारण मरीज के चमड़ी पर रोग उत्पन्न होता है और परेशानी पैदा करता है यह उन कोशिकाओं को ठीक करने का कार्य करती है। मध्य प्रदेश के साथ ही नागपुर रीजन में इस दवा का पहला प्रयोग जबलपुर में ओजस क्लिनिक में किया गया है। जबलपुर के रहने वाले एक व्यक्ति जो कई सालों तक जर्मनी में नौकरी कर रहे थे अब वापस जबलपुर आ गए और वह यहीं से कार्य कर रहे हैं। दवा बनाने वाली कंपनी ने बताया कि इस इंजेक्शन का पहला प्रयोग जर्मनी से आए मरीज पर जबलपुर में किया गया है और यह मध्य प्रदेश और नागपुर रीजन का पहला मामला है।
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Author: Jai Lok






