
जबलपुर (जय लोक)। पिछले तीन-चार दशक से जबलपुर और यहां से निकल कर बाहर के शहरों में भी बड़े-बड़े काम कर रहे एक नामचीन बिल्डर वर्तमान समय में नगर निगम प्रशासन की रडार में आकर निशाने पर हैं। शहर की प्राइम लोकेशन पर चल रही बिल्डर की साइड पर नियम कानून को दरकिनार रखते हुए ऐसी अनियमितताएं कर दी हैं कि वह अब निगम प्रशासन की कार्यवाही की जद में आ गए हैं।
इसके अलावा शहर के हृदय स्थल में बसे नगर निगम के मार्केट के कई बड़े व्यापारी नगर निगम की भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा कर अनियमिताओं के साथ निर्माण कार्य कर चुके हैं और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बिना अनुमति के बढ़ा लिया है। सिविक सेंटर क्षेत्र के आसपास ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जो नगर निगम के सर्वे में खुलकर सामने आ चुके हैं।
अब ऐसे धन कुबेर रोजाना नगर निगम के मुख्यालय के चक्कर लगाते हुए नजर आ रहे हैं। वर्तमान में नगर निगम प्रशासन की कमान संभाल रहे आई.ए.एस अधिकारी राम प्रकाश अहिरवार जल्द दबाव में आने वाले अधिकारियों में शामिल नहीं है। ख्याति प्राप्त बिल्डर ने अपनी फर्म के 30-40 साल पुराने कार्यकाल और गुडविल सब गिनवा दी लेकिन इसको सुनने के लिए भी आयुक्त ने पहले धनबल के प्रभावी लोगों को 1 घंटे का इंतजार करवाया क्योंकि उस समय स्वास्थ्य विभाग की बैठक चल रही थी।

स्पष्ट है आयुक्त का नजरिया
वर्तमान समय में आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार का शहर में चल रही कार्रवाइयों के प्रति नजरिया स्पष्ट है। अतिक्रमण संबंधी कार्रवाइयों के संबंध में नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि नगर निगम की कारवाई सबके लिए बराबर है।
अगर सडक़ किनारे के अतिक्रमणकारियों ठेले, गुमटी संचालकों पर कार्यवाही होगी तो फिर शहर के बड़े अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही होगी। फिर चाहे वह शोरूम बनाकर बैठे हों, माल बनाकर बैठे हों या शासकीय भूमि में नियम विरुद्ध निर्माण कार्य करके बैठे हों।
नगर निगम की कार्यवाही के दौरान जो गलतियां बिना दस्तावेज के आंख से नजर आती हैं उन पर तत्काल कार्यवाही कर दी जाती है। वहीं जो गलतियां जानबूझकर दस्तावेज तैयार कर की जाती है उन पर कार्यवाही करने में निगम प्रशासन को कुछ समय लगता है और वह पहले नोटिस देने के साथ-साथ नियम कानून के अंतर्गत पूरी कार्यवाही को सुनिश्चित रूप से अंजाम देने का पूरा प्रोटोकॉल निर्धारित कर लेते हैं।

राइट टाऊन, नेपियर टाऊन, गोलबाजार की लीज में दी गई भूमि पर विशेष पहरेदारी
नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने नगर निगम के इतिहास में पहली बार नगर निगम द्वारा लीज पर दी गई भूमि को वापस अधिग्रहण करने के मामले में उल्लेखनीय कार्यवाही की है। डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की राइट टाउन प्रेम मंदिर के पास स्थित रहवासी क्षेत्र के लिए आवंटित भूमि पर की गई कार्यवाही काफी चर्चाओं में है। विवादों में फंसी 50 करोड़ से अधिक की भूमि को नगर निगम ने वापस अपने स्वामित्व में ले लिया है और यहां पर नगर निगम का एक कार्यालय भी खुल चुका है। आयुक्त और नगर निगम प्रशासन इस कार्यवाही से उत्साहित है। अब इसके बाद नगर निगम द्वारा लीज पर दी गई सभी प्रकार की भूमियों की जाँच प्रारंभ हो गई है कि वह लीज अनुबंध के तहत शर्तों का पालन कर रहे हैं की नहीं।
इसमें यह भी देखा जा रहा है कि लीज आवंटन के समय जो शर्तें रखी गई थीं जो लीज आवंटन का मुख्य उद्देश्य था उसे पूरा किया जा रहा है या नहीं किया जा रहा है। बहुत सारी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं जहां पर निजी आवास हेतु भूमि का आवंटन प्राप्त किया गया है लेकिन वर्तमान में बिना अनुमति के वहां पर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन हो रहा है। फ्री होल्ड के नाम पर धंधे बाजी की जा रही है। बहुत सारे ऐसे लीज धारी भी हैं जिन्होंने वर्तमान समय में उठा पटक कर राजनीतिक एप्रोच लगाकर लीज रिन्यू करा ली है। लेकिन उनके प्लाट आज भी लावारिस और खाली हालत में पड़े हुए हैं। नियमों का उल्लंघन करते हुए वर्तमान समय में भी उसे पर निर्माण कार्य नहीं हुआ है। निगम प्रशासन की दृष्टि से यह सिर्फ टैक्स चुकाने से बचने का एक हथकंडा है।

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Author: Jai Lok






