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बांधवगढ़ में बाघों की मौत पर वन विभाग मौन

एसआईटी गठन के 52 दिन बाद भी नहीं दे पाई रिपोर्ट
भोपाल (जयलोक)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच आठ बाघों की मौत का मामला अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। इन मौतों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) 52 दिन बीतने के बाद भी अपनी रिपोर्ट वन मुख्यालय को नहीं सौंप सका है। इससे पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा अब न्यायिक जांच के दायरे में भी पहुंच गया है और मप्र हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई चल रही है।
तत्कालीन वन बल प्रमुख वीएन एम्बाडे ने 19 जनवरी को एसआईटी का गठन करते हुए 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। सेवानिवृत्ति से ठीक पहले 23 फरवरी को उन्होंने दोबारा पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट जल्द भेजने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद वन मुख्यालय को रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।
हाई कोर्ट में भी चल रही सुनवाई
बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान वन विभाग ने प्रारंभिक जानकारी दी है। विभाग के अनुसार टाइगर रिजर्व के भीतर दो बाघों की मौत आपसी संघर्ष के कारण हुई। एक बाघ कुएं में गिरकर डूब गया, जबकि एक अन्य बाघ की मौत बीमारी से बताई गई है। इसके अलावा चार बाघों की मौत बिजली के करंट लगने से हुई।
बाघ प्रबंधन पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही बाघों की मौतों ने राज्य में वन्यजीव प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2025 में ही मध्य प्रदेश में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई थी, जिससे बाघ संरक्षण की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार ने जंगलों के आसपास मानव गतिविधियों को नियंत्रित करने और मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना बनाई थी। इसके लिए 2025 में करीब 145 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया गया था। इसके बावजूद बाघों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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