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हिंदुस्तान पेट्रोलियम में पेट्रोल-डीजल की किल्लत का हल्ला, बाकी कंपनी में पर्याप्त है ईधन, वाहन चालकों की चिंता बढ़ी

जबलपुर (जय लोक)। ईरान-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत सहित शहर में भी देखा जा रहा है। पहले से रसोई गैस को लेकर मारा मारी चल रही है। एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की सुबह से लंबी लाईन देखी जा रही है। यह संकट अभी खत्म भी नहीं हुआ कि लोगों के सामने पेट्रोल डीजल का संकट भी गहराता दिख रहा है। दरअसल शहर के कई पेट्रोल पंप खाली हो गए हैं और पेट्रोल पंपों के बाहर पंप बंद होने का बोर्ड लगा दिया गया है। यह पेट्रोल पंप हिंदुस्तान पेट्रोलियम के बताए जा रहे हैं। वाहन चालक रोज पेट्रोल मिलने की आस लेकर पंपों पर पहुँचते हैं लेकिन बाहर बंद का बोर्ड देखकर किसी अन्य पेट्रोल पंपों को तलाशनें में जुट जाते हैं।

हिंदुस्तान पेट्रोल पंपों के बंद होने का कारण पेट्राल डीजल की सप्लाई की चैन टूटना बताया जा रहा है। इसके अलावा इंडियान ऑयल और भारत पेट्रोल पंपों पर पेट्राल डीजल की खेप पहुँच रही हैं जिससे यहां वाहन चालकों को पेट्रोल डीजल की सप्लाई की जा रही है। लेकिन हिंदुस्तार पेट्रोल पंप सूख गए हैं। इन पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल डीजल की खेप नहीं पहुँची जिसके कारण उन्हें कुछ समय के लिए बंद कर दिए हैं।

इस मामले में हिंदुस्तान पेट्रोल पंप के कर्मचारियों का कहना है कि पम्पों पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो गया है। तेल की खेप न पहुँचने के कारण उन्हें विक्रय रोकना पड़ा है। उनके अनुसार जैसे ही तेल के टैंकर पंप पर पहुँचेंगे, वितरण प्रक्रिया पुन: शुरू कर दी जाएगी। वर्तमान में आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता बनी हुई है जिसके कारण भविष्य में भी इस तरह के व्यवधान की संभावना जताई गई है।

भुगतान के बाद भी नहीं मिल रहा पंपों को पेट्रोल

इस संबंध में हिंदुस्तान पेट्रोल पंप के कर्मचारियों का कहना है कि उनके द्वारा पेट्रोल डीजल की सप्लाई के लिए एडवांस भुगतान भी दे दिया गया है लेकिन इसके बाद भी पंपों को पेट्रोल डीजल की सप्लाई नहीं की जा रही है। जिसके कारण वे उपभोक्ताओं को पेट्रोल डीजल का वितरण नहीं कर पा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर

ईंधन की इस किल्लत के पीछे वैश्विक परिस्थितियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वर्तमान में जारी युद्ध की स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस वैश्विक हलचल का सीधा असर अब हिंदुस्तान पेट्रोल पंपों पर भी पड़ा है। तेल कंपनियों द्वारा आपूर्ति में कटौती किए जाने से डिपो स्तर पर स्टॉक कम हो गया है। इसी कमी के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों तक नियमित रूप से ईंधन नहीं पहुँच पा रहा है।

उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

वहीं पंपों में पेट्रोल की सप्लाई ना हो पाने के के कारण उपभोक्ता और व्यापारी वर्ग खासे परेशान दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल वितरण व्यवस्था की चैन टूटने से रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन और तेल कंपनियाँ अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रही हैं ताकि शहर की परिवहन व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

दैनिक उपयोग की चीजों पर पड़ा असर

घरेलू गैस और पेट्रोल डीजल की सप्लाई का असर रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ रहा है। एक और होटलों ने जरूरत के हिसाब से वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लिया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर लागत बढऩे से खाने पीने की सामग्रियों के भी दाम बढ़ा दिए गए हैं। लोगों का कहना है कि भले ही यह दाम अभी बढ़ गए हों लेकिन हालात सामान्य होने के बाद होटलों में बढ़े हुए खाने पीने की सामग्री के दाम वापस कम नहीं होंगे।

इनका कहना है

हिंदुस्तान पेट्रोल पंपों में पेट्रोल की कमी नहीं हैं। यहां पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल डीजल की सप्लाई हो रही हैं। दूसरी कंपनियों के पेट्रोल पंपों में पेट्रोल डीजल की कमी देखने को मिल रही है।
निमीष सिंह, सीआरएम, हिंदुस्तान पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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