
जबलपुर (जय लोक)। शहर की गन कैरिज फैक्ट्री सैना के लिए तीन सौ धनुष तोपों का निर्माण कर सकती है। यह तीन सौ तोपें सेना को अगले पाँच सालों में सौंपी जाएगी। अभी तक स्वतृत्र रूप से जीसीएफ ही इसका निर्माण कर रही थी। लेकिन अब इसके निर्माण के लिए एलएनटी कंपनी की सहभागिता भी ली जाएगी। जीसीएफ की तरफ से इसका टारगेट भी तैयार कर लिया गया है। जिसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में भी है और जल्द ही इस पर औपचारिक मुहर लगाकर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर में दिखा धनुष तोप का महत्व
धनुष तोप का महत्व ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखने को मिला। जब धनुष तोप ने पाकिस्तान सेना को परेशान कर दिया। सटीक निशाना और मारक क्षमता ने इसकी उपयोगिता बढ़ा दी और सेना का इस तोप पर भरोसा बढ़ा। धनुष तोप की खूबी यह है कि इसमें 99 फीसदी पुर्जे स्वदेशी हैं। जिससे इसका निर्माण पूरी तरह से जीसीएफ में किया जाता है।

2012 को मिला था आर्डर
वर्ष 2012 में जीसीएफ को 114 धनुष तोपों का आर्डर दिया गया था। जिसमें अब तक 56 तोपों की डिलेवरी की जा चुकी है। वहीं 19 तोपें अभी डिलवेरी के लिए तैयार हैं। जीसीएफ धनुष तोपों की सप्लाई में 60 प्रतिशत कार्य पूरा कर चुकी है। वहीं भारतीय सेना भी अगले साल धनुष तोप के और आर्डर देने का मन बना रही है। जिससे उम्मीद लगाई जा रही है कि फैक्ट्री को तीन सौ और धनुष तोपों का आर्डर मिल सकता है।

ये है धनुष तोप की खासियत
धनुष तोप 155 मिमी, 45 कैलिबर की अत्याधुनिक तोप है, जिसकी मारक क्षमता 38 से 42 किलोमीटर तक है। इसमें 95 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है।
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Author: Jai Lok






