
जबलपुर (जय लोक)। आज अलम जुलूस निकला जिसमें बड़ी संख्या में नगर के शिया बंधु शरीक हुए। यौमे आशूरा को शिया समाज द्वारा सुबह 7 बजे मस्जिद जाकिर अली में आशूरा के हवाले से इबादत की तत्पश्चात सुबह 8 बजे शिया इमामबाड़े में मजलिसहई के सामने पहुंचा जहां मुरादाबाद से पधारे मौलाना जनाब ज़ाफऱ रज़ा साहब मौजूद रहे। वहां जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों फूटाताल खटीक मोहल्ला सुनरहाई होता हुआ कोतवाली थाने में उपस्थित जनों को शहीदों की याद में संबोधित किया। जहां मौलाना साहब ने यज़ीदि जुल्म के मुकाबले इमाम हसेन सत्य और इंसाफ के शस्त्र से मुकाबले की दास्तान के बयान की वहीं नौजवानों से आव्हान किया कि दुनयावी शिक्षा के साथ साथ मजहबी शिक्षा भी हासिल करें क्योंकि धार्मिक शिक्षा प्राप्त इंजीनियर, डाक्टर या प्रशासनिक अधिकारी कभी भ्रष्ट नहीं हो सकता उसके आचरण में कोमलता एवं जनता की भलाई के संस्कार रहेंगे क्योंकि भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा तंत्र देश के विकास में बाधा है।

हर हुसैनी का कर्तव्य है कि इस भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी हवी आतंकवादी से मुकाबला करे ना खुद रिश्वतखोर एवं भ्रष्टाचारी बने और ना ही संरक्षण दे, आपने इमाम हुसैन की तालीम को आम जन तक पहुंचाने पर जोर दिया तकरीर के पश्चात जुलूस आगे बढ़ा जुलूस में सर्वश्री शुजाअत रिज़वी, शमसुल, काजिम, फैजान, एजाज़, सुज्जु नक़्वी एवं भुट्टू ने नोहे पढ़े जिस पर शिया बंधु ने मातम किया है मातम सोग मनाने का प्राकृतिक तरीका है।

दुनिया में जब किसी का अपना दर्दनाक तरीके से या सादा तरीके से मर जाता है तो वो भी सीने पर हाथ मारकर रोता है, अतएव शिया हजऱात 1400 सालों से. इमाम हुसैन और उनके घर वालों और सहाबियो के गम में मातम कर रहे है। और इमाम हुसैन पर हुए जुल्म पर अफसोस प्रकट करने हेतु मजलिस का आयोजन करते आ रहे है। जुलूस बड़ा फुहारा, बल्देवबाग आगाचौक होते हुए रानीताल कर्बला में 2 बजे समापन हुआ। रात्रि 8 बजे शिया इमामबाड़े गलगला में शामे गरीबा की मजलिस हुई ।
संस्था सचिव अफसर हुसैन नक्वी ‘फीजू’ ने प्रशासनिक सहयोग हेतु आभार प्रकट किया।


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Author: Jai Lok






