
महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ा सकती है सरकार
नई दिल्ली (जयलोक)। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह सत्र करीब तीन सप्ताह तक चल सकता है, हालांकि इसकी अंतिम तारीखों पर संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) की मंजूरी अभी बाकी है। सामान्यत: मानसून और शीतकालीन सत्र चार सप्ताह तक चलते हैं और इनमें लगभग 20 बैठकें होती हैं, लेकिन पहले भी कम अवधि के सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
यह सत्र कई राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच होने जा रहा है। नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्ध मामले से लेकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी, एसआईआर और हालिया विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन के बाद संसद में राजनीतिक माहौल गर्म रहने की संभावना है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली बार सत्ता में आने के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों की उस मांग पर फैसला करना है, जिसमें उन्होंने सदन में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, इन मामलों पर निर्णय सत्र शुरू होने से पहले लिया जा सकता है।
विधायी एजेंडे में महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के पुनर्गठन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक भी प्रमुख मुद्दा हो सकता है। पिछले सत्र में यह विधेयक लोकसभा से पारित नहीं हो सका था। अब सरकार इसका संशोधित मसौदा तैयार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। इस मॉडल का उद्देश्य जनसंख्या आधारित परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को संतुलित करना बताया जा रहा है। राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद सत्तापक्ष का संख्याबल भी मजबूत हुआ है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
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Author: Jai Lok






