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ठेकेदारों के इशारे पर  नाच रहे बिजली अधिकारी, 3 दिन से अघोषित बिजली कटौती जैसा माहौल, लाखों लोग परेशान, जेई, एई, डीई, किसी को कटौती की जानकारी नहीं, लोग लगाते रहे फोन मगर अधिकारियों पर बेशर्मी हावी

जबलपुर (जय लोक)। विगत तीन दिनों से जबलपुर के मध्य क्षेत्र में लगातार सुबह से अघोषित बिजली कटौती जैसा कार्यक्रम बिजली कंपनी की ओर से चल रहा है। 3 अगस्त 4 अगस्त और आज 5 अगस्त की सुबह हजारों लाखों लोगों के लिए परेशानी लेकर आई। बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के रोजाना सुबह दो से तीन घंटे तक अघोषित बिजली की कटौती की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार बिजली कटौती का यह पूरा कार्य निजी ठेकेदारों की मर्जी के अनुसार किया जा रहा है। तार और पोल बदलने के कार्यों को बिना तरीके से पूरी योजना बनाएं ना ही उपभोक्ताओं को पूर्व में सूचना दिए बिना ठेकेदारों की मनमर्जी से यह अघोषित कटौती की जा रही है। विद्युत विभाग के अधिकारी ठेकेदारों के इशारों पर नाचते हुए नजर आ रहे हैं।

सबसे बड़ी विडंबना की बात यह है कि बिजली क्यों बंद की गई है कितने घंटे बाद चालू होगी इसका क्या कारण है इस बात की कोई पूर्ण सूचना तो दी ही नहीं जाती। इसके बावजूद क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और डिविजनल इंजीनियर तक को की गई कटौती के संबंध में जानकारी नहीं रहती है। यह अपने आप में कितनी शर्मनाक बात है कि क्षेत्र की जिम्मेदार अधिकारियों को ही इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके अधीनस्थ क्षेत्र में बिजली की कटौती कर दी गई है और लोग हैरान और परेशान हो रहे हैं।
इन सभी अधिकारियों को लगातार फोन लगाने के बावजूद भी कोई जवाब नहीं मिलता है और जनता के सेवक जनता के ही फोन नहीं उठाते हैं ना ही बाध्य विद्युत सप्लाई के संबंध में कोई पुख्ता जानकारी दे पा रहे हैं। जिसके कारण स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर घरों में मौजूद महिलाएं, बुजुर्ग और कामकाजी व्यक्तियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रभावित हो रहे व्यापार

इस अघोषित बिजली कटौती के दौर में सबसे अधिक उन व्यापारियों को परेशानी हो रही है जो तीन दिनों से सुबह से अपनी दुकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान खोलकर कार्य करने लगते हैं। लेकिन तीन दिनों से अघोषित बिजली कटौती के माहौल में इन व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही है। क्षेत्रीय व्यापारियों कहना है कि वर्तमान में विद्युत मंडल जिस प्रकार से अघोषित कटौती कर व्यापारियों को परेशान कर रहा है। उसके कारण पूरे क्षेत्र के व्यापारियों में आक्रोश पनप रहा है।

सरकार की हो रही बदनामी

अगर तीन दिनों से जिस प्रकार से विद्युत मंडल अघोषित की बिजली कटौती कर ठेकेदारों के इशारों पर नाच रहा है, उससे सीधे तौर पर लाखों आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है, हजारों की संख्या में व्यापारी परेशान है। स्कूल जाने वाले बच्चे, सुबह से दिनचर्या से प्रभावित बुजुर्ग सभी के मनों में विद्युत विभाग की इस कार्य प्रणाली के कारण पनप रहा आक्रोश भाजपा सरकार के खिलाफ  निकल रहा है। लोगों को कहना है कि विद्युत मंडल ठेकेदारों की मनमानी से प्रभावित हैं और सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है किसी की कोई जवाबदारी नहीं है। व्यापारियों और आम जनता को जो नुकसान विद्युत कटौती के दौरान होता है उसके हर्जाने की भरपाई की कोई बात नहीं करता लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसकी है यह भी तय होना चाहिए।

बिल वसूली के लिए चार-चार बार भेजते हैं मैसेज, कटौती के लिए एक भी नहीं

विद्युत मंडल अपने उपभोक्ताओं से बकाया बिल की वसूली भले ही वह 70 रूपये का बिल हो उसके लिए एक ही मैसेज को चार-चार पांच पांच बार उपभोक्ताओं को भेजता है और इसके लिए वह बाकायदा मैसेज भेजने वाली कंपनी को पैसा यह भी अदा करता है। लेकिन विद्युत कटौती के समय अधिकांश समय किसी प्रकार का कोई भी संदेश या पूर्व सूचना उपभोक्ताओं को नहीं दी जाती। इसलिए इस प्रकार की मनमर्जी से की जा रही विद्युत कटौती को अघोषित विद्युत कटौती ही कहा जाएगा जो आम जनता को लगातार परेशान कर घंटे गर्मी में और बिना  बिजली सुविधा के बैठने और उनके कामकाज को प्रभावित करने के लिए मजबूर करती है।
बिल में देरी पर लगता है जुर्माना तो अघोषित कटौती पर भी लगना चाहिए
आम उपभोक्ताओं विशेष कर व्यापारी वर्ग के लोगों में बढ़ रहे आक्रोश के बाद अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि जब विद्युत मंडल उपभोक्ताओं से बिल में देरी होने के कारण पेनाल्टी लगाकर जुर्माने के रूप में अधिक राशि वसूल करता है, तो फिर विद्युत मंडल की भी जवाबदारी निर्धारित होनी चाहिए। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में कार्य कर रही यह कंपनियां क्या केवल उपभोक्ताओं पर अधिकार जमा कर उन्हें लूटने के लिए है। उपभोक्ता अगर पूरी राशि अदा करता है तो उसका अधिकार है कि उसे उसी के अनुरूप गुणवत्ता वाली सेवाएं भी प्राप्त हों, और अगर उपभोक्ताओं को यह सुविधा देने में विद्युत मंडल असफल हो रहा है तो उसके ऊपर भी इस अघोषित बिजली कटौती के लिए जुर्माना लगना चाहिए। अगर उपभोक्ताओं की भुगतान की जिम्मेदारी तय है तो सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सुविधा देने वाले विद्युत मंडल की भी जिम्मेदारियां अच्छी सेवाएं देने के लिए सुनिश्चित होनी चाहिए। तीन-चार घंटे की विद्युत कटौती में व्यापारियों का कितना नुकसान होता है इसका भी अंदाजा विद्युत मंडल को होना चाहिए।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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