
जबलपुर (जयलोक)। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के इतिहास में कल हुई घटना काले अध्याय के समान है। विभिन्न छात्र संगठन आज से नहीं कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रांगण में प्रदर्शन करते आए हैं। लेकिन आज तक कभी भी किसी कुलपति जो अब कुलगुरु कहलाने लगे हैं ने खुद घटनास्थल पर पहुंचकर अपने गुंडा नुमा कर्मचारियों से छात्रों के साथ मारपीट नहीं करवाई। विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों का विरोध, उनकी मांगे, उनका आंदोलन पुरानी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन आज तक रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐसी कलंकित करने वाली घटना नहीं हुई जब कोई कुलगुरु खुद ही अनुशासनहीन होकर अपने 5-6 गुंडेनुमा कर्मचारियों को लेकर छात्रों के साथ मारपीट करवाये। यहां तक की रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शैक्षित्तर कर्मचारी संघ के द्वारा भी विगत 6 दिनों से क्रमिक अनशन प्रदर्शन का दौर जारी है। यह भी कुलगुरु बने प्रोफेसर राजेश वर्मा की असफलता है कि वह विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कर्मचारियों को भी संतुष्ट रखकर छात्र हित में विश्वविद्यालय को सुचारू रूप से संचालित नहीं कर पा रहे हैं। हर मोर्चे पर कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा बुरी तरीके से असफल हो रहे हैं और पूरे प्रदेश और देश में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित नाम को भी कलंकित करने का कार्य उनके ेद्वारा हो रहा है।

पहली बार कोई कुलगुरु थाने पहुँचा

जानकारों का मानना है कि यह बड़े शर्म का विषय है कि कल के घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कोई कुलगुरू स्वयं थाने में जाकर अपने गुंडे कर्मचारियों के पक्ष में दबाव बनाकर छात्रों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज करवाने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। जबकि कुलगुरु का पद राज्य मंत्री के दर्जे के समान होता है और उसकी एक गरिमा होती है। प्रोफेसर राजेश वर्मा इस गरिमा को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
कल के घटनाक्रम के जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं उसमें स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है कि किस प्रकार कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा ने अपने खास गुंडे नुमा कर्मचारियों को मारपीट करने के लिए कर्मचारी संघ के धरना प्रदर्शन स्थल पर मौजूद मध्य प्रदेश स्टूडेंट यूनियन के अभिषेक पांडे और उनके साथियों के साथ मारपीट करने के लिए भेजा। मारपीट की शुरुआत भी लात मार कर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने की इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से हाथपाई पी हुई।


कर्मचारी पीटने लगे तो भाग खड़े हुए कुलगुरु-
वायरल हुए वीडियो में यह भी साफ नजर आ रहा है कि जब कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा के कहने पर कर्मचारी नेता प्रमोद पुरोहित और उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का इशारा मिलते ही छात्र नेताओं और कर्मचारी संघ के पदाधिकारी के साथ बदसलूकी की शुरूआत कर दी। कर्मचारी नेता पुरोहित ने ही सबसे पहले छात्रों पर लात चलाना शुरु किया जिसके बाद छात्रों ने उसे पटककर जमकर उसकी धुनाई कर दी। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि अपने गुंडेनुमा कर्मचारियों को पिटते हुआ देख कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा तत्काल वहां से दबे पांव भाग लिए और कुछ दूर पर खड़ी अपनी कर के अंदर जाकर छुप गए।
अयोग्यता को लेकर लगे हैं गंभीर आरोप
– कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा मूलत: इंदौर के शासकीय कॉलेज में अपनी सेवाएं देते थे। उसके बाद राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हुआ और जुगाड़ की प्रचलित राजनीति और चरण वंदना की नीतियों का पालन करते हुए कुलगुरु का पद कई योग्य लोगों को पीछे छोड़ हासिल करने में सफल हो गए। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजय यादव खुले तौर पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं और आज भी अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी हित में विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को सुचारु करने की मांगों के साथ धरना आंदोलन जारी रखे हुए हैं। कुलगुरु बनने की पात्रता के जो पैमाने निर्धारित किए गए हैं उन पैमानों में प्रोफेसर राजेश वर्मा फिट नहीं बैठ रहे हैं और उनकी अयोग्यता को लेकर लंबे समय से बहस जारी है।
छात्रों की फीस के पैसे से विलासिता का जीवन – छात्र संगठन के पदाधिकारियों ने खुले तौर पर इस बात के आरोप भी लगाए हैं कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर सहित आसपास के कई जिलों के गरीब और मध्यम वर्गीय छात्र-छात्राओं के शिक्षा प्राप्त करने का बड़ा मंदिर है। यहां गरीब और अन्य बच्चों की आने वाली फीस से विश्वविद्यालय में कुलगुरु बन बैठे प्रोफेसर राजेश वर्मा विलासिता का जीवन जी रहे हैं। इससे संबंधित भी कई आरोप सामने आए हैं और लगातार प्रशासन से इस संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। आखिर विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के फीस के पैसे से फिजूल खर्ची करने का अधिकार किसने दिया और अगर ऐसा हो रहा है तो इस पर कार्रवाही कौन करेगा।
कुलगुरु इस्तीफा दो- चलेगा अभियान
कुलगुरु के दबाव में आकर मध्य प्रदेश स्टूडेंट यूनियन के अभिषेक पांडे सहित अन्य लोगों पर बिना जाँच के दर्ज की गई एफ आईआर के विरोध में अब पूरे जिले के कॉलेज में कुलगुरु की मनमानी के खिलाफ छात्र संगठनों का बड़ा आंदोलन प्रारंभ होने जा रहा है। इस अभियान के तहत कुलगुरु इस्तीफा दो के तहत विभिन्न कॉलेजों के प्रांगण में प्रदर्शन होगा। कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा के ऊपर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर के अनुसार भी परीक्षाएं आयोजित ना करा पाने की अक्षमताओं के आरोप भी लगे हुए हैं।
Author: Jai Lok






