
भोपाल (जयलोक)। प्रवर्तन निदेशालय ने सागा ग्रुप से जुड़े कथित पोंजी घोटाले के मामले में मुंबई और भोपाल में कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत की गई। जांच के दौरान ईडी ने करीब 37 करोड़ रुपये की संपत्ति और अन्य सामान जब्त व फ्रीज किया है। ईडी की तरफ से जानकारी दी गई कि यह मामला लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) और उससे जुड़ी अन्य सहकारी समितियों से संबंधित है। जांच में सामने आया है कि लोगों को वर्ष 2009 से आरडी, एफडी और मंथली इनकम जैसी योजनाओं में निवेश के नाम पर पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
30 करोड़ से अधिक की संपत्ति फ्रीज
छापेमारी के दौरान ईडी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर, सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसी और बैंक खातों में जमा रकम को फ्रीज किया है। इसके अलावा नौ महंगी गाडिय़ां भी जब्त की गई हैं। जांच एजेंसी ने कार्रवाई के दौरान 1.53 करोड़ रुपये नकद और करीब 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा भी जब्त की। इसके साथ ही करीब 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और चांदी की ईंटें भी बरामद की गई हैं।
50 से ज्यादा फर्जी कंपनियों का नेटवर्क
ईडी की जांच में 50 से अधिक ऐसी शेल कंपनियों और संस्थाओं के नेटवर्क का पता चला है, जिन पर कथित तौर पर समूह के संचालकों का नियंत्रण था। जांच एजेंसी के मुताबिक, सागा ग्रुप के सीएमडी और मुख्य नियंत्रक बताए जा रहे समीर अग्रवाल देश छोडक़र फरार हैं। ईडी ने बताया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की हैं। आरोप है कि एलयूसीसी और उससे जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से लोगों को अलग-अलग निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए आकर्षित किया गया और बाद में रकम के दुरुपयोग का मामला सामने आया।
Author: Jai Lok






