
रूस और वेनेजुएला में भारत ने खेला दांव, फंसा पैसा तेल के रूप में वसूला
नई दिल्ली (जयलोक)। दुनिया के दो सबसे बड़े ऑयल हॉटस्पॉट रूस और वेनेजुएला में भारत ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने पश्चिमी देशों के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया। एक तरफ जहां दुनिया को लग रहा था कि भारत का रूस में जो निवेश था वो डूब चुका है। वहां से भारत को अरबों डॉलर का जैकपॉट मिला है। दूसरी तरफ वेनेजुएला जहां भारत का पैसा सालों से फंसा था वहां अब भारत सिर्फ हिस्सेदारी नहीं बल्कि मालिक बनने जा रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रोएन ऑयल रिजर्व है। दुनिया का करीब 17फीसदी कच्चा तेल यही है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का ओएनसी विदेश लिमिटेड ओवीएल ने यहां सालों पहले बड़ा निवेश किया था। सैन क्रिस्टोबॉल में भारत की 40फीसदी हिस्सेदारी थी। काराबो वन इसमें ओवीएल, आईओसी और ऑयल इंडिया को मिलाकर 18फीसदी हिस्सा था। अमेरिकी प्रतिबंधों और वेनेजुला की आर्थिक बदहाली की वजह से यहां उत्पादन ठप हो गया। सैन क्रिस्टाबॉल से मात्र 10,870 बैरल और कारा बोबो से 970 बैरल प्रतिदिन निकल रहा था। जो कि ऊंट के मुंह में जीरे के समान था। अब हमारे 500 600 मिलियन के डिविडेंड्स वहां फंसे हुए थे, लेकिन अब पासा पलट गया।
रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब वह विदेशी कंपनियों को सिर्फ शेयर नहीं दे रहे हैं बल्कि उन्हें ओनरशिप और ऑपरेटरशिप भी दे रहे हैं। इसका मतलब यह है कि अब ओएनजीसी वहां के कुओं से तेल निकालने का काम खुद कंट्रोल करेगी। अमेरिका ने भी इसके लिए विशेष लाइसेंस जारी कर दिया है। यह भारत के लिए जैकपॉट इसलिए है क्योंकि अब वहां के ऑपरेशंस अपने हिसाब से हैंडल करेंगे। अपना फंसा हुआ पैसा तेल के रूप में वसूल पाएगा।
साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ और रूस ने सखालिन वन के पूरे ढांचे को बदलकर एक नई रशियन कंपनी बना दी। शर्त यह रखी गई कि अगर विदेशी पार्टनर जैसे कि भारत की ओवीएल को अपना 20फीसदी स्टिक वापस चाहिए तो उन्हें फिर से पैसा देना होगा और वह भी रूसी रूबल में। अब दुनिया को लगा कि भारत तो फंस गया। भारत ने यहां मास्टर स्ट्रोक खेल दिया। हमारे करीब 800 मिलियन के डिविडेंड्स पहले से ही रूस में फंसे हुए थे। प्रतिबंधों के कारण हम उन्हें भारत नहीं ला पा रहे थे। अब भारत ने रूस से कहा कि भाई वो पैसा जो वहां पर फंसा है उसे ही हमारे नए स्टेक की पेमेंट आप मान लीजिए।
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Author: Jai Lok






