
चयन में कलंक से बचना होगा भाजपा को, जनप्रतिनिधियों को देना है संगठन को नाम
जबलपुर (जय लोक)। भारतीय जनता पार्टी के किसी भी प्रकोष्ठ और मंडल में एक पद पर कई दावेदारों का होना स्वाभाविक है। एक पद पर एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि लंबे समय से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी ने अब अपने कार्यकर्ताओं से ज्यादा नेताओं की फौज खड़ी कर दी है। इसमें भी उन लोगों को अधिक महत्व दिए जाने का चलन चल पड़ा है जो पार्टी लाइन पर भले ही काम ना करेंं लेकिन अर्थ बल और बाहुबल के धनी हों, भले ही उनके ऊपर कई आपराधिक मामले दर्ज हों, भले ही वे कई असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त हों, लेकिन उनका अन्य मापदंडों पर सक्षम होना नियुक्ति का एक बड़ा पैमाना बनता नजर आ रहा है। यही कारण है कि अब भाजपा में किसी भी प्रकोष्ठ, मोर्चा, संगठन, मंडल तक की नियुक्ति में कई बार पार्टी की रीति – नीति को दरकिनार कर होने वाली नियुक्तियों का विरोध भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है। एक बार फिर भाजपा की अनुसूचित जाति मोर्चा कार्यकारिणी के गठन का समय नजदीक आता नजर आ रहा है और इसी के साथ ही जो लंबी दावेदारों की सूची है उनमें शामिल नामों पर मंथन भी शुरू हो गया है।
पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जितने दावेदार अनुसूचित मोर्चा की कार्यकारिणी में शामिल होने के लिए दौड़ में बने हुए हैं उनमें से कई लोगों का लंबा चौड़ा आपराधिक रिकॉर्ड भी है। कुछ तो अपने संबंधित थाना क्षेत्र में निगरानीशुदा बदमाशों की सूची में भी शामिल हंै। वर्तमान में भी दावेदारी में शामिल बताए जा रहे ऐसे कई नाम हैं जो अवैध व्यापार में लिप्त हैं, नशे के कारोबार से भी जुड़े हुए हैं। दावेदारों में इस प्रकार के नामों की संख्या अधिक होने के कारण लंबे समय से कार्यकारणी का विस्तार भी रुका हुआ है। क्योंकि भाजपा की रीति- नीति, पार्टी लाइन पर चलने वाले लोग इन नाम के विरोध में हंै इनमें से कई नामों पर बड़े नेताओं का विरोध भी संगठन स्तर पर सामने आ चुका है।

जनप्रतिनिधियों से भी माँगे गए हैं नाम
कार्यकारिणी के विस्तार के पूर्व जिन-जिन पदों पर नियुक्तियाँ होनी हैं, उन पर रायशुमारी करते हुए और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से भी उनकी राय और सहमति के रूप में तीन-तीन नाम माँगे गए हैं। जनप्रतिनिधि की ओर से संगठन को दिए जाने वाले नाम पर भी सब की नजरें टिकी हुई हैं। जो विवादित नाम हैं वह सब की जुबान पर हैं। जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है वह सबको पता है। विशेष कर वो लोग जो कई दशकों से भाजपा का काम कर रहे हैं वे अपराधिक पृष्ठभूमि वाले नामों पर सबसे ज्यादा आपत्ति उठाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि प्रदेश से लेकर नगर संगठन तक इस प्रकार की चर्चाओं और चल रहे अंडरकरेंट की जानकारी नहीं है। लेकिन किसी न किसी जनप्रतिनिधि का अपना-अपना स्वार्थ अपने गुट और दल के लोगों को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है।

अमित खरे जैसे लोगों से भाजपा को मिला है सबक
हाल ही में पाँच लोगों की हत्या के आरोपियों में मास्टरमाइंड की भूमिका में शामिल स्मार्ट सिटी अस्पताल का संचालक डॉ. अमित खरे जेल गया है। जेल जाने के पूर्व अमित खरे खुद को भाजपा का स्थापित नेता साबित करने में हर संभव प्रयास करता था और इसी के आधार पर वह अधिकारियों पर भी धौंस जमाता था। अमित खरे ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं से लेकर स्थानीय स्तर तक के नेताओं के साथ तस्वीर साझा कर यह दर्शाने की कोशिश की थी कि वह भाजपा में अंदर तक घुसपैठ रखता है। इतने बड़े अपराधिक कांड में फंसने के बाद जब जानकारियां बाहर आना प्रारंभ हुईं तब स्पष्ट हुआ कि अमित खरे वर्तमान में भाजपा का सदस्य भी नहीं है पूर्व की नियुक्तियाँ समाप्त हो चुकी हंै। इसके साथ ही हर बड़े छोटे नेता ने उसको जानने पहचानने और उससे संबंध होने तक से इनकार कर दिया। इसके पूर्व एक और विवादित नाम था जो पूर्व विधानसभा में एक वार्ड से पार्षद पद की दावेदारी कर रहा था और पिछले चुनाव में लगभग उसकी टिकट घोषित होने की स्थिति आ गई थी फिर उसके अपराधिक कर्मकांड का खुलासा हुआ तो भाजपा ने अपने कदम पीछे हटा लिए और यह कहें कि अपनी साख बचा ली।
एससी मोर्चा की कार्यकारिणी का गठन होना है। इस मोर्चे की चर्चा इसलिए अधिक हो रही है क्योंकि इसमें पूर्व में भी ऐसे लोग पदाधिकारी बन गए थे जिनके नाम पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे उसके बावजूद भी भाजपा ने अपने संगठन सब जानते हुए मोर्चे में पदाधिकारी बना दिया था। बाद में यह बड़ी आलोचना का कारण बना था।
अब एक बार फिर एक अनार सौ बीमार की स्थिति में अपराधिक प्रवृत्ति के असामाजिक लोगों की दावेदारी कार्यकारिणी में पद पाने के लिए चर्चा में है। निर्णय संगठन के हाथ में है कि वह भाजपा पार्टी की गरिमा के अनुरूप चयनित होने वाले नाम की पृष्ठभूमि के अनुसार पदों का वितरण करेगी या फिर जनप्रतिनिधि के दबाव में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को भी स्थान प्राप्त करने में कामयाबी मिलेगी।


Author: Jai Lok






