
जबलपुर (जय लोक)। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में वर्तमान कुलगुरु अपने अलग ही कारनामों के कारण विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा अनियमित व्यवस्थाओं के कारण छात्रों के निशाने पर भी हैं और पटरी से उतर चुकी विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के कारण भी कर्मचारी संगठनों के विरोध को भी झेल रहे हैं। लगातार तीन हफ्तों से विश्वविद्यालय के प्रांगण में रानी दुर्गावती शैक्षणिक कर्मचारी संघ के बैनर तले कुलगुरु को हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इनके द्वारा की जा रही अनियमितताओं की पोल खुल रही है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की साख पर बट्टा तो लग ही रहा है साथ ही यह संदेश भी स्पष्ट रूप से जा रहा है कि कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा विश्वविद्यालय का संचालन ठीक से नहीं कर पा रहे हैं और विरोधाभासी स्थितियां लगातार बढ़ती ही जा रही हैं।

कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का नया कारनामा भी अब सामने आया है। कुलगुरु पर आरोप लगे हैं कि वह बिना शासकीय नियमों का पालन कर और राज भवन की अनुमति लेने की प्रथा और गाइडलाइन दोनों को दरकिनार कर अपनी मर्जी से हवाई यात्रा करते हैं और उसका आर्थिक बोझ विश्वविद्यालय के खजाने पर डालने हेतु बड़ी बेशर्मी के साथ इसके बिल प्रस्तुत कर उसके भुगतान प्राप्त करने की कवायत भी की जा रही है। आरोप तो और भी कई लगे हैं जिनका खुलासा लगातार होता जा रहा है।
वर्तमान में जो दस्तावेज दैनिक जय लोक की टीम के हाथ लगे हैं उसमें यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा द्वारा भोपाल और पुणे प्रवास पर हवाई यात्रा की गई। इस हवाई यात्रा के 14845 के बिल विश्वविद्यालय के कोषालय में भुगतान हेतु प्रस्तुत कर दिए गए। ऐसे मामलों में ऑडिट विभाग में पदस्थ लोग किसी भी प्रकार के प्रभाव और दबाव में नहीं आते क्योंकि भविष्य में जब ऐसे मामले खुलते हैं तो उन्हीं की कलम फंसती है और कार्रवाई की गाज भी उन्हीं के ऊपर गिरती है। इस मामले में भी गड़बड़ी के अंदेशा को देखते हुए सांकेतिक रूप से ऑडिट विभाग की ओर से नोट शीट में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है कि नियमानुसार यात्रा की पूर्व अनुमति और राज्य से बाहर जाने की अनुमोदित यात्रा कार्यक्रम की अनुमति प्रेषित की जाए।
जानकारों का कहना है कि कुल गुरु को मुख्यालय छोडऩे से पहले राज भवन से अनुमति लेना आवश्यक होता है इसके अलावा जो भी प्रवास के कार्यक्रम निर्धारित होते हैं उनमें होने वाले अनुमानित व्यय की अनुमानित स्वीकृति भी लेनी होती है। लेकिन मनमर्जी पर उतारू कुलगुरु प्रोफेसर वर्मा के द्वारा ऐसी कोई भी अनुमति नहीं ली गई और यह बात हवाई यात्रा के बिल भुगतान की फाइल में ऑडिट विभाग के द्वारा लगाई गई आपत्ति में भी स्पष्ट हो रही है।

यह है मामला
विगत 6 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यालय से एक फाइल यात्रा देयक के भुगतान बावत तैयार हुई। इस फायल में कुलगुरु प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा के द्वारा अकादमी के प्रशासनिक प्रवास को दर्शाते हुए 14845 रुपए का भुगतान करने का विवरण प्रस्तुत किया गया है।
उक्त नोट शीट में यह दर्शाया गया है कि कुलगुरु प्रोफेसर वर्मा 28. 5.2026 को मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उपस्थित होने तथा 29 और 30 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा की कार्यशाला में सहभागिता करने हेतु हवाई जहाज से यात्रा पर गए थे। इन यात्राओं के हवाई यात्रा के बिल भुगतान हेतु विश्वविद्यालय के अकाउंट सेक्शन में प्रस्तुत किए गए।
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हस्ताक्षर नहीं थे अत: वापस भेजी गई नस्ती
इसी नोट शीट में आगे इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि परीक्षण के दौरान यह पाया गया की यात्रा देयक बनाने वाले के देयक में हस्ताक्षर नहीं है। इसलिए फाइल को वापस कुलगुरु के कार्यालय में भेज दिया गया। बाद में कुलगुरु के द्वारा ही हस्ताक्षर करके पुन: बिल भुगतान के लिए फाइल प्रेषित कर दी गई।
बिल भुगतान की इस फाइल में आगे इस बात की भी आपत्ति लगाई गई है की यात्रा प्रवास की पूर्व स्वीकृति और राज्य से बाहर जाने का अनुमोदित यात्रा कार्यक्रम फाइल में संलग्न नहीं है जिसे संलग्न करना आवश्यक है। बाद में बिलों को प्राप्त करने के लिए आयोजनों से संबंधित आमंत्रण पत्रों की छाया प्रति लगा दी गई लेकिन राज्य भवन से प्राप्त होने वाली अनुमति का कहीं उल्लेख नहीं है।
लगातार आरोपों से घिरे कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा के द्वारा अब विश्वविद्यालय के खजाने में मनमर्जी के अनुसार आर्थिक बोझ डालने का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है। कुल मिलाकर कुलगुरु के इस प्रकार के कार्यकलापों से प्रतिष्ठित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पूरे प्रदेश और देश में धूमिल हो रही है।
कर्मचारियों में अव्यवस्थाओं को लेकर आक्रोश है। समय पर परीक्षाएं नहीं होने और परिणाम प्राप्त नहीं होने के कारण छात्रों में रोष है। शैक्षणिक कार्यों में अनियमिताओं की दर्जनों शिकायतें हैं सामने आ चुकी हंै ऐसी स्थिति में कुल गुरु को हटाने और किसी अधिक सक्षम व्यक्ति को विश्वविद्यालय की कमान सौंपने की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
Author: Jai Lok





