
जबलपुर, (जयलोक)
हाई कोर्ट ने जबलपुर के ह्दय-विदारक बहुचर्चित न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड प्रकरण में सख्ती बरती। इसी के साथ तत्कालीन सीएमएचओ के विरुद्ध कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दे दिए। इसके लिए अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक का समय दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने आठ व्यक्तियों की मौत से जुड़े इस मामले में अब तक तत्कालीन सीएमएचओ के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नदारद होने पर नाराजगी जताई। महज एक इंक्रीमेंअ रोकने की सजा को नाकाफी निरूपित किया। मुख्य सचिव तक इस सजा के अपर्याप्त होने संबंधी शपथ पत्र पेश कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकार अब तक समुचित सजा का निर्धारण नहीं कर पाई है। दरअसल, ला स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष् विशाल बघेल की ओर से दायर याचिका में जबलपुर में नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान किए जाने को चुनौती दी गयी थी। जिसमें अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया था कि नियमों को ताक में रखकर संचालित न्यू लाइफ अस्पताल में हुए अग्नि हादसे में हुई आठ व्यक्तियों की मौत हो गई थी। आपातकालीन द्वार न होने के कारण लोग बाहर तक नहीं निकल पाए थे। कोरोना काल में विगत तीन साल में 65 निजी अस्पतालों को संचालन की अनुमति दी गई है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गई है, उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गई है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बावजूद अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। भौतिक सत्यापन किये बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। मामले की पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करते हुए बताया गया था कि अस्पताल का निरीक्षण करने वाले डाक्टरों की टीम के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित है। तत्कालीन सीएचएमओ को एक इंक्रीमेंट रोकने की सजा से दंडित किया गया है।

Author: Jai Lok







