
जबलपुर (जयलोक)
लोकसभा चुनाव के 4 जून को आने वाले चुनाव परिणाम इस बार दोनों राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के कई पार्षदों, विधायकों और खुद को दमदार बताने वाले कई नेताओं का भविष्य तय करेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों ही राजनीतिक दलों के लोगों के द्वारा लोकसभा क्षेत्र में किए गए कार्य और दी गई जिम्मेदारी का आंकलन करने के बाद उनका रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। यह रिपोर्ट कार्ड भाजपा और कांग्रेस के संगठन द्वारा 4 जून को आने वाले मतगणना के परिणाम के पोस्टमार्टम के बाद तैयार किया जाएगा।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को भीतर घात का सामना करना पड़ा है। कुछ स्थानों पर तो लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों को जैसी करनी वैसी भरनी का उलाहना देते हुए भी विरोध, असहयोग, निंदा का सामना करना पड़ा है। अपने ही दल के कुछ नेताओं ने प्रत्याशियों का खुलकर विरोध भी किया है, कुछ इतने नाराज थे कि चुनाव अभियान से दूरी बना ली। कुछ ऐसे नेता भी थे जो अपनी पार्टी द्वारा बनाए गए उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहे थे। लेकिन पार्टी के आला कमान के सामने अपने नंबर कम ना हों इसलिए पार्टी के प्रति वफादारी दिखाते हुए मैदान में बेमन से नजर आ रहे थे।भाजपा कांग्रेस के कुछ पार्षद ऐसे थे जिन्होंने बड़ी-बड़ी बातें करके पार्षद के चुनाव में जीत हासिल की और फिर विधानसभा चुनाव में बहुत बुरे परिणामों से गुजरे। बड़ी-बड़ी बातें करने वाले यह पार्षद विधानसभा चुनाव में अपना वार्ड भी नहीं जीत पाए। कुछ वार्डों में तो पार्षद अपना बूथ तक हार गए।
लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने अपने पार्षदों को अपना वार्ड जीतने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप थी। इसी प्रकार विधानसभा चुनाव में जीतकर आए विधायकों पर भी अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्डों को जीतने की जिम्मेदारी सौपीं गई। अब यह निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता के बीच में कितना काम कर पाए हैं? पार्टी के हित में कितनी पेठ बना पाए हैं? अपने क्षेत्र की जनता के बीच में खुद का क्या प्रभाव स्थापित कर पाए हैं? इन सब सवालों का पोस्टमार्टम 4 जून को आने वाले चुनाव परिणाम में किया जाएगा।
यह तो वह सवाल है जो सामान्यत: लोगों के मन में उठ रहे हैं। भाजपा जैसे संगठन में तो सवालों का पूरा फॉर्म तैयार होगा। इन बिंदुओं के अलावा जन प्रतिनिधियों के द्वारा किए जाने वाले सकारात्मक और नकारात्मक दोनों कार्यों की गणना भी चुनाव परिणाम के साथ की जाएगी।
कांग्रेस संगठन भी करेगा समीक्षा
कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल में संगठन नामक सिर्फ शब्द ही रह गया है इसकी व्यवस्था पूरी तरीके से छिन्न-भिन्न नजर आती है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं नेताओं पर संगठन का तो कोई दबाव है या नहीं यह कहीं नजर नहीं आता है। इस वजह से निरंकुश कार्यकर्ता और नेता कांग्रेस के नाम पर जो मन में आता है वह करते हैं। संगठन की इसी कमजोरी से कांग्रेस गर्त की ओर तेजी से दौड़ रही है।
वैसे तो सूत्रों द्वारा चुनाव परिणाम आने पर उसकी समीक्षा करने की बात कही जा रही है। लेकिन यह भी सर्वविदित है कि इस समय कांग्रेस का हर नेता गद्दारों से घिरा हुआ है। हर नेता और उसके समर्थक एक दूसरे के मन में द्वेष भाव की गांठे बांधकर रखे हुए हैं। विधानसभा चुनाव में भी इसी जलन भावना से कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा का काम आसान कर दिया और आज भी चिल्लाने की स्थिति में भी नहीं बचे हैं। लोकसभा चुनाव में भी इस प्रकार के बहुत सारे प्रकरण चर्चाओं में आए हैं जहां कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही खिलाफत और विरोध की बातें प्रदेश संगठन तक पहुँचाई गई हैं। पूर्व में भी ऐसी शिकायतों को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के समक्ष रखा जा चुका है लेकिन इन पर कोई वाजिब कार्यवाही न होने के कारण निरंकुश कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं और संगठन की अवधारणा खत्म होती जा रही है।
संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका का भी होगा आंकलन
पार्टी सूत्रों के अनुसार इस वक्त बीजेपी और कांग्रेस के बीच में भाजपा का संगठन कांग्रेस से कहीं अधिक मजबूत है। भाजपा संगठन के पदाधिकारियों को पूरे चुनाव के दौरान विशेष जिम्मेदारियाँ सौंपी जाती है। ऐसा नहीं है कि संगठन के भीतर उठा पटक नहीं मची हुई है। राजनीतिक द्वेष और अति महत्वाकांक्षी भावनाएं संगठन के बीच में अक्सर विरोधाभास और टकराव पैदा करते नजर आती हैं। इन सब घटनाओं से संबंधित जानकारी भी प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर के संगठन पदाधिकारी तक समय-समय पर पहुँचती रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिस पर प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन संज्ञान ले रहा है। चुनाव परिणाम के समय संगठन में कार्य करने वाले और कार्य न करने वाले लोगों के कार्यों का भी आकलन किया जाएगा और इसी के आधार पर उनका राजनीतिक भविष्य भाजपा में तय होगा।

Author: Jai Lok







