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कहो तो कह दूँ …..बिना ‘पंजी इन्वेस्ट’ किए करोड़पति बनना है तो ‘बाबा’ बन जाओ

चैतन्य भट्ट
लोग बाग पैसा कमाने के लिए कितने जतन करते हैं। कोई नौकरी करता है तो कोई बिजनेस करता है, नौकरी में आठ घंटे पिसना पड़ता है तब कहीं जाकर महीने के अंत में तनख्वाह मिलती है, बिजनेस में भी भारी कंपटीशन रहता है सुबह से व्यापारी दुकान खोलता है और रात को जब घर जाता है तो पता लगता है कि आज तो कोई बिक्री हुई ही नहीं। बड़े-बड़े बिजनेसमैन जरूर अरबपति हो जाते हैं लेकिन वो पूंजी भी तो इतनी लगाते हैं तब कहीं जाकर बरसों बाद अरबपति कहलाते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसी स्कीम बता रहे हैं जिसमें पंजी का भी इन्वेस्टमेंट नहीं है। ना कोई पूंजी लगाना, ना कोई एजेंसी लेना, ना किसी चीज का निर्माण करना, बस एक चीज आपको आना चाहिए और वो है धकापेल ‘मुंह  चलाना’ ,अगर आपको मुंह चलाना आता है तो समझ लो ये बिजनेस आपके लिए सबसे ज्यादा मुफीद होगा। करना क्या है वह भी हम बताएं देते हैं बस किसी गांव में किसीपेड़ के नीचे बैठ जाओ आने जाने वालों को आशीर्वाद देने लगो, कुछ ज्ञान की बातें उन्हें बताने लगो, बस देखते-देखते आपकी प्रसिद्धि आसपास पहुंच जाएगी, किसी को भभूत दे दो तो किसी के मन की बात बता दो और आजकल किसी के भी मन की बात बताना तो बहुत आसान काम है क्योंकि हर आदमी का एक ही उद्देश्य वो है पैसा कमाना। बस इतना ही तो कहना कि पैसा तो बहुत आता है लेकिन बचता नहीं, वो गदगद हो जाएगा और फिर से उसके सिर पर हाथ रखकर उसे एकाध नारियल पकड़ा दो। सौ दो सौ लोगों में दस बीस भी  अगर अपने काम में सफल हो गए तो समझ लो आपका काम बन गया। धीरे-धीरे अपना आश्रम बना लो कथा कहने लगो, लोगों की भीड़ अपने आप इक_ी होने लगेगी और जब भीड़ इक_ी होगी तो वो दान दक्षिणा भी देगी। कोई बड़ा आदमी चंगुल में फंस गया तो वो आश्रम को महलनुमा बना देगा और वरना अगर धंधा जम के चल गया तो आप खुद ही आश्रम को फाइव स्टार होटल बना सकते हो। सोच लो कि बिना पांच पैसा लगाए कैसे करोड़पति बना जा सकता है। अब ‘भोले बाबा’ को ही देख लो कहां फटियल सी नौकरी कर रहे थे और आज उनका प्रवचन सुनने दो दो लाख लोग इकठ्ठे हो रहे हैं न जाने कितनी उनको दक्षिणा मिल गई होगी आश्रम भी ऐसे हैं कि बड़े-बड़े होटल उनके सामने फेल हैं जनता का क्या है वो तो परेशान है ही और अगर कोई उसकी परेशानी हल करने की बात करता है तो उसका चेला बनना तय है। आजकल कथा वाचकों का बड़ा जलवा है बड़े-बड़े नेता बाबाओ के चरणों में पहुंचकर अपने-अपने वोट पक्के करने में लगे रहते हैं और जब बड़े-बड़े नेता वहां पहुंचते हैं तो जनता को भी लगता है कि बाबा जी बड़े दिव्य पुरुष है और उनका आशीर्वाद लेना बहुत जरूरी है लेकिन इस धंधे में सबसे बड़ी चीज है आपकी ‘मार्केटिंग’ बहुत तगड़ी होना चाहिए जितनी तगड़ी मार्केटिंग होगी उतने लोग आपके चरण रज पाने के लिए लालायत होंगे और जिनको आपके चरणों की धूल मिल जाएगी वे अपने आप को धन्य समझेंगे इसलिए मेरा तो कहना है कि जिनका कहीं काम नहीं जम रहा है, ना नौकरी  लग पा रही है ना धंधा जम पा रहा है उनके लिए इससे अच्छा और कोई बिजनेस हो नहीं सकता।
जवानी की चाहत
दुनिया में जो भी आया है उसकी बस एक ही चाहत होती है कि वो आजीवन जवान बना रहे लेकिन ऊपर वाले ने भी उसकी इस इच्छा पर रोक लगाकर बुढ़ापा भी तय कर दिया है लेकिन इस बुढ़ापे को रोकने के लिए लोग पता नहीं क्या-क्या करते हैं और फिर कोई भी ‘डुकरा’ होना क्यों चाहेगा वह क्यों चाहेगा कि उसके चेहरे पर झुर्रियां आ जाएं, गाल पिचक कर लटक जाए, बाल झड़ के वो टकला हो जाए दांत टूट जाए तो पोपला हो जाए, इसलिए पूरी दुनिया में जवान बनने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं आज ही अखबार में पढ़ा है कि दो हजार अरब  रुपया जवान बनने के लिए लोग खर्च कर चुके हैं और क्यों ना करें जवानी किसको अच्छी नहीं लगती।  जिन हसीनअभिनेत्रियों  के करोड़ों चाहने वाले हुआ करते थे जब वे डुकरिया हो गई है तो कोई उन्हें देखना भी पसंद नहीं करता। जवान बनने के लिए लोग प्लास्टिक सजज़्री करवा लेते हैं, सफेद बालों पर काली डाई पोत लेते हैं, नकली बत्तीसी लगवा लेते हैं लेकिन बुढ़ापा छिपता तो है नहीं कितनी ही कोशिश कर लो जब कोई लडक़ी ‘अंकल’ जी या ‘दादाजी’ कह देती है तो सारी स्कीम धरी की धरी रह जाती है क्योंकि ऊपर से कितने ही जवान बनने की कोशिश कर लो अंदर तो बुढ़ापा पहुंच ही जाता है लाख जींस पहन लो उसके ऊपर टी शटज़् लटका लो लेकिन बुढ़ापा कहीं ना कहीं से दिखाई दे ही जाता है इसलिए इस गाने पर भरोसा करना चाहिए।
‘लाख छुपाओ छुप ना सकेगा राज है इतना गहरा, बुढ़ापे की बात बता देता है ये नकली चेहरा’
पुल तो है पुल
सुना है कि बिहार में लगातार नदियों पर बने पुल नदियों में समाते जा रहे हैं अब हाल ये हो गया है तो यात्रीगण किसी भी नदी को नाव के सहारे पार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जिस पुल से वे नदी पार करने जा रहे हैं वह उन्हें बीच रास्ते में ही डुबो देगा। किसी पुल पर से पैर रखने के पहले आदमी सौ बार सोचता है कि जाऊं की ना जाऊं। इंतजार करता है किसी और के पुल  पार करने का और अगर कोई दूसरा पुल पार कर भी कर लेता है तब भी उसको भरोसा नहीं होता कि वो भी पुल पार कर लेगा। दरअसल अफसरों और ठेकेदारों की मिली भगत से कोई नहीं बच पाता अब जितना मटेरियल उनमें लगना चाहिए उसका आधा भी लगता नहीं, अब जब शरीर में दम नहीं होगा तो पुल क्या हाथी भी खड़े खड़े गिर जाएगा। कई पुलों ने तो खुद ही नदी में कूद कर ‘सुसाइड’ कर लिया कि क्यों किसी की जान ले हम खुद ही जान दे देते हैं। अब पता लगा है कि सरकार ने चार छह अफसरों को सस्पेंड कर दिया है लेकिन उनको भी मालूम है कि कुछ ही दिनों में पैसा खर्च करके वे फिर से रीस्टेट हो जाएंगे और किसी नए पुल की तलाश में जुट जाएंगे। अपना तो मानना है कि पुलों पर यह गाना बिल्कुल सटीक बैठता है।
‘पुल तो है पुल, पुल का एतबार क्या कीजे,टपक गया नदी में तो क्या कीजे’
सुपर हिट ऑफ  द वीक
श्रीमती जी ने श्रीमान जी को  मैसेज किया – ‘आपको पड़ोसन कैसी लगती है…?’
श्रीमती जी को खुश करने के लिए श्रीमान जी  ने रिप्लाई किया- ‘एकदम बंदरिया जैसी’…!
‘ठीक है तो घर आते  समय मेरे लिए दो साड़ी लेते आना, नहीं तो ये मैसेज पड़ोसन को दिखा दूंगी…!अवैध उत्खनन करने वालों की जाँच शुरू

Jai Lok
Author: Jai Lok

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