
बहराइच (एजेंसी/जयलोक)
उत्तर प्रदेश के बहराइच में महाराजा सुहेलदेव राजकीय मेडिकल कॉलेज मे कंगारू पद्धति से इलाज शुरू किया गया है। 3 साल के अंदर 2600 बच्चों, जिनकी प्रीमेच्योर डिलीवरी हुई थी। जिनका वजन 1800 ग्राम से कम था। उन बच्चों को मां के आंचल में रखकर उनकी देखरेख की गई।
कंगारू पद्धति से किए गए इलाज के कारण बच्चे जल्द ही स्वस्थ हो गए, और तेजी से उनका वजन बढ़ा। मेडिकल कॉलेज के न्यूबोर्न केयर यूनिट के इंचार्ज डॉक्टर असद अली के अनुसार मां की ममता और मां का आंचल किसी भी जीवन रक्षक मशीन से ज्यादा शक्तिशाली होता है।मां का स्पर्श बच्चे के लिए दवा जैसा काम करता है।मां के आंचल में बच्चा अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है। 2021 में अमेरिकी संस्था के साथ मिलकर फ्री मेच्योर बच्चों के लिए कंगारू पद्धति से उपचार शुरू किया गया। 3 साल में 90 फ़ीसदी प्रीमेच्योर बच्चों को बचाने में सफलता मिली। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संजय खत्री का कहना है इस प्रोजेक्ट में हम चार तरह से बच्चों की देखभाल करते हैं। पहले हिस्से में अस्पताल में मां की उचित देखभाल, दूसरा प्रीमेच्योर बच्चों के जन्म होने पर बच्चे की कंगारू पद्धति से केयर, तीसरा समय-समय पर फोन कॉल के माध्यम से परामर्श,चौथा तरीका घर जाकर बच्चों की समय-समय पर जांच करना है। अस्पताल में एक कंगारू मेडिकल केयर वार्ड बनाया है।जहां पर प्रीमेच्योर बच्चों का इलाज होता है। हाल ही में 28 सप्ताह में पैदा हुए प्रीमेच्योर बच्चे का कवच उसकी मां बनी। वह हर वक्त अपने बच्चे को सीने से चिपका कर रखती थी। इसी तरह से मादा कंगारू अपने बच्चों को पालती है। अस्पताल की नर्स,मां को बच्चों के तापमान पल्स और जरूरी संकेत को समझने में सहायता करती है। बच्चों को किस तरह से ब्रेस्ट फीडिंग कराई जाए, इसकी जानकारी दी जाती है। आपात स्थिति में उसे किस तरह से सहायता लेनी है।यह बच्चे की मां को समझाया जाता है। कंगारू पद्धति से प्रीमेच्योर बच्चों को आसानी से बचाया जा सकता है। यह काम मशीन से ज्यादा कंगारू पद्धति से एक मां आसानी से कर पाती है।

Author: Jai Lok







