
(जय लोक)। प्रदेश के हर शहर में सडक़ सुरक्षा कमेटी की बैठक होती है जिसमें सडक़ सुरक्षा के उपायों पर शहर के आला अफसर मिल बैठकर विचार करते हैं कि यातायात कैसे सुधारा जाए, सडक़ों पर लोगों की सुरक्षा कैसे हो, उसी तर्ज पर महाकौशल की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर में सडक़ सुरक्षा कमेटी की बैठक हो गई। शहर के तमाम अफसरान इकठ्ठे हुए, बेहतरीन नाश्ते का इंतजाम किया गया सब ने अपनी अपनी आंखों को साफ किया और जोर-जोर से आंसू बहाने लगे और बोले, सचमुच कितने लोगों की जान ले रहे हैं ये भारी वाहन, किसी मां की कोख सूनी हो रही है, तो किसी के सिर से पिता का साया दूर हो रहा है, आखिर ये भारी वाहन कब तक लोगों के खून से होली खेलेंगे, हमारी आंखों से तो आंसू रुक नहीं रहे हैं, लगता है एक दूसरे गले से लिपट कर हम जितना रो सके रो लें, क्योंकि शहरवासियों का दुख हम लोगों से देखा नहीं जाता। एक अफसर बोला कि हम लोगों का कर्तव्य है कि हम लोगों की जान की सुरक्षा करें हमसे जनता का दुख और परेशानी देखी नहीं जाती इसलिए हमें आंसू बहाना जरूरी है ये बात अलग है कि हमारे ये आंसू ‘ओरिजिनल’ नहीं बल्कि ‘घडय़िाली आंसू’ हैं। हम तो खुद नहीं चाहते कि ट्रक वाले शहर से बाहर जाएं पर क्या करें जनता को बताना पड़ता है कि हमें उनकी जान माल की कितने चिंता है, एक दूसरे अफसर ने सलाह दी कि सोचो ये भारी वाहन कैसे बाहर जा सकते हैं, कोई कमेटी बनाओ, कुछ एक्सपर्ट को बाहर से बुलाओ, एकाध साल तक उन्हें सोचने का मौका दो फिर उनसे रिपोर्ट मांगो, फिर उसका अध्ययन करो, देखो कि रिपोर्ट में कोई दम है या नहीं, यदि कहीं भी थोड़ी गुंजाइश दिखे तो इस कमेटी को बदल दो, दूसरी कमेटी बना दो, लोगों को लगना चाहिए कि हम लोग भारी वाहनों को शहर से बाहर करने के लिए जी जान से लगे हैं इसी चक्कर में साल दर साल बीतते जाएंगे और हमारे दोस्त लोग बेहतरीन धंधा करते रहेंगे, जनता हमेशा की तरह बेवकूफ बनती रहेगी। अपना तो कहना है इन लोगों से कि जनता से साफ साफ क्यों नहीं कह देते कि इनसे ही तो हमारी ‘रोजी-रोटी’ चलती है और फिर ‘जिंदगी और मौत’ तो ऊपर वाले के हाथ में है इसमें हम क्या कर सकते हैं। एक बात जरूर है कि ये ट्रांसपोर्ट वाले गजब के बलशाली हैं कितने अफसर, आए और चले गए परंतु वे टस से मस नहीं हुए, इसलिए वे मूंछों पर ताव देकर, सीना ठोक कर कहते हैं कोई माई का लाल पैदा ही नहीं हुआ जो हमें बाहर कर सके और जो हमें बाहर करने की कोशिश भी करेगा वो भले ही ‘मुछमुंडा’ हो जाए पर हमारी मूंछ का एक बाल भी कम नहीं होगा ये सौ टके की बात है।
सुंदरता भी बला बनी
पेरिस में हुए ओलंपिक खेल में ‘पराग्वे’ की एक महिला तैराक ‘लुआना अलोंसो’ को इसलिए खेल गांव से बाहर कर दिया गया क्योंकि वो बला की खूबसूरत थी और उसके साथ के प्रतिद्वंदियों का कहना था कि उनके हुस्न को देखकर उनके होश उड़ जाते हैं और वे अपनी तैराकी में मन नहीं लगा पा रहे हैं। अरे भैया तुम लोग तैरने आए हो या फिर तैरने वाली की खूबसूरती देखने, उस तरफ से आंख मूंद लेते लेकिन तुम्हें तो सुंदरता देखने में आनंद आ रहा था तो अपना खेल छोडक़र उसकी खूबसूरती में खो गए। तुम्हें पता नहीं है कि महिलाएं अपनी खूबसूरती के लिए तरह-तरह के जतन करती हैं तरह-तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करती हैं ताकि वे खूबसूरत दिखें लेकिन ओलंपिक में तो ये खूबसूरती ही उस महिला तैराक के गले की फांस बन गई। इसके बाद से अब ये लगता है कि अगर आपको ओलंपिक में जाना है तो पहले अपनी खूबसूरती को बदसूरती में बदलो, चेहरे पर कुछ काला पीला पोत दो शरीर की कमनीयता को कुछ थुलथुल कर लो ताकि आपके प्रतिद्वंदी आपको देखकर अपना ध्यान ना भटका पाएं, लेकिन इस बात का भी डर है कि अगर आप बदसूरत बनकर गए तो कहीं ये प्रतिद्वंदी ये ना कहने लगें कि इनकी बदसूरती देखकर हमारा ध्यान भटक जाता है इसलिए इन्हें खेल से हटाया जाए। यानी अब प्रतियोगी क्या करें क्या न करें, ये सोचना बड़ा मुश्किल हो गया है। वैसे अभी चार साल आगामी ओलंपिक में है तमाम प्रतियोगी अपने-अपने हिसाब से सोचे कि उन्हें क्या करना होगा।
जुएं ने रोक दी फ्लाइट
एक खबर पता लगी है कि ‘लॉस एंजेलिस’ से ‘न्यूयॉर्क’ जाने वाली फ्लाइट को सिर्फ इसलिए रोकना पड़ा की एक यात्री ने दूसरे यात्री के बालों में ‘जुआं’ रेंगता हुआ देख लिया था उसने तत्काल शिकायत की और हवाई जहाज को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, इस चक्कर में फ्लाइट बारह घंटे लेट हो गई। अपने को तो समझ में नहीं आता कि अगर किसी के सिर पर जुआं चल भी रहा था तो वो उसका सर दर्द था दूसरे यात्री को उससे क्या लेना देना था, ये भी हो सकता है कि वो जुआं उसका अपना पालतू हो, वो बाहर जा रहा हो तो सोचा होगा कि इसको अकेला घर पर कैसे छोड़ कर जाएं तो अपने साथ ले आया था और फिर जुआं बालों में नहीं रहेगा तो कहां रहेगा, बाल तो उसका ‘परमानेंट रेसीडेंस’ होता है, फिर दूसरी बात पड़ोसी यात्री अपने जुएं वाले यात्री के बालों को इतनी गहराई वाली निगाहों से देख क्यों रहा था कि उसे जुआं दिख गया ,वो तो बेचारा अपने मालिक के साथ किसी तरह बिना टिकट फ्लाइट में यात्रा कर रहा था लेकिन कहते हैं ना ‘विघ्न संतोषियों’ की कमी नहीं है सो उसकी शिकायत हो गई और अंत में उस प्यारे जुएं को एयरपोर्ट पर छोडक़र उस यात्री को जाना पड़ा।
सुपर हिट ऑफ द वीक
‘शादी के बाद मैं लखपति हो गया’ श्रीमान जी ने अपने दोस्त को बताया
‘पर ये बात तुम इतने उदास होकर क्यों बतला रहे हो ये तो खुशी की बात है’ दोस्त ने पूछा
खाक खुशी की बात है बेवकूफ आदमी, शादी के पहले मैं करोड़पति था श्रीमान जी ने उसे समझाया।
पेरिस में हुए ओलंपिक खेल में ‘पराग्वे’ की एक महिला तैराक ‘लुआना अलोंसो’ को इसलिए खेल गांव से बाहर कर दिया गया क्योंकि वो बला की खूबसूरत थी और उसके साथ के प्रतिद्वंदियों का कहना था कि उनके हुस्न को देखकर उनके होश उड़ जाते हैं और वे अपनी तैराकी में मन नहीं लगा पा रहे हैं। अरे भैया तुम लोग तैरने आए हो या फिर तैरने वाली की खूबसूरती देखने, उस तरफ से आंख मूंद लेते लेकिन तुम्हें तो सुंदरता देखने में आनंद आ रहा था तो अपना खेल छोडक़र उसकी खूबसूरती में खो गए। तुम्हें पता नहीं है कि महिलाएं अपनी खूबसूरती के लिए तरह-तरह के जतन करती हैं तरह-तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करती हैं ताकि वे खूबसूरत दिखें लेकिन ओलंपिक में तो ये खूबसूरती ही उस महिला तैराक के गले की फांस बन गई। इसके बाद से अब ये लगता है कि अगर आपको ओलंपिक में जाना है तो पहले अपनी खूबसूरती को बदसूरती में बदलो, चेहरे पर कुछ काला पीला पोत दो शरीर की कमनीयता को कुछ थुलथुल कर लो ताकि आपके प्रतिद्वंदी आपको देखकर अपना ध्यान ना भटका पाएं, लेकिन इस बात का भी डर है कि अगर आप बदसूरत बनकर गए तो कहीं ये प्रतिद्वंदी ये ना कहने लगें कि इनकी बदसूरती देखकर हमारा ध्यान भटक जाता है इसलिए इन्हें खेल से हटाया जाए। यानी अब प्रतियोगी क्या करें क्या न करें, ये सोचना बड़ा मुश्किल हो गया है। वैसे अभी चार साल आगामी ओलंपिक में है तमाम प्रतियोगी अपने-अपने हिसाब से सोचे कि उन्हें क्या करना होगा।
जुएं ने रोक दी फ्लाइट
एक खबर पता लगी है कि ‘लॉस एंजेलिस’ से ‘न्यूयॉर्क’ जाने वाली फ्लाइट को सिर्फ इसलिए रोकना पड़ा की एक यात्री ने दूसरे यात्री के बालों में ‘जुआं’ रेंगता हुआ देख लिया था उसने तत्काल शिकायत की और हवाई जहाज को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, इस चक्कर में फ्लाइट बारह घंटे लेट हो गई। अपने को तो समझ में नहीं आता कि अगर किसी के सिर पर जुआं चल भी रहा था तो वो उसका सर दर्द था दूसरे यात्री को उससे क्या लेना देना था, ये भी हो सकता है कि वो जुआं उसका अपना पालतू हो, वो बाहर जा रहा हो तो सोचा होगा कि इसको अकेला घर पर कैसे छोड़ कर जाएं तो अपने साथ ले आया था और फिर जुआं बालों में नहीं रहेगा तो कहां रहेगा, बाल तो उसका ‘परमानेंट रेसीडेंस’ होता है, फिर दूसरी बात पड़ोसी यात्री अपने जुएं वाले यात्री के बालों को इतनी गहराई वाली निगाहों से देख क्यों रहा था कि उसे जुआं दिख गया ,वो तो बेचारा अपने मालिक के साथ किसी तरह बिना टिकट फ्लाइट में यात्रा कर रहा था लेकिन कहते हैं ना ‘विघ्न संतोषियों’ की कमी नहीं है सो उसकी शिकायत हो गई और अंत में उस प्यारे जुएं को एयरपोर्ट पर छोडक़र उस यात्री को जाना पड़ा।
सुपर हिट ऑफ द वीक
‘शादी के बाद मैं लखपति हो गया’ श्रीमान जी ने अपने दोस्त को बताया
‘पर ये बात तुम इतने उदास होकर क्यों बतला रहे हो ये तो खुशी की बात है’ दोस्त ने पूछा
खाक खुशी की बात है बेवकूफ आदमी, शादी के पहले मैं करोड़पति था श्रीमान जी ने उसे समझाया।
Author: Jai Lok







