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टीआई और सीएसपी की जाँच में छुपा है निर्दोष और दोषी का पूरा खेल पूर्व में न्यायालय से भी ख़ारिज हो चुके हैं लगाए गए आरोप-आदर्श अग्रवाल

ऑडिट रिपोर्ट फर्जी है तो आईटी विभाग से निकलवाई जाए प्रमाणित प्रति

जबलपुर (जयलोक)
शहर के दो नामचीन बिल्डरों के बीच में चल रहे कानूनी दांव पेच में लगातार नए नए खुलासे हो रहे हैं। चैतन्य सिटी के डायरेक्टर बिल्डर आदर्श अग्रवाल पर आर के प्रमोटर एंड डेवलपर्स के डायरेक्टर राजेश जैन पिंकी, नीरज गुप्ता और ओमप्रकाश अग्रवाल ने यह आरोप लगाया कि उन्होंने एक ही जमीन इन तीनों को बेची और इस कार्य में उनके साथी सुशील निगम का भी योगदान था। इस पूरे मसले पर सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी शिकायत की जाँच दो बार हो चुकी है।
पूर्व के वर्षों में ओमती थाने में पदस्थ तत्कालीन जाँच अधिकारी ने भी इस पूरे मामले की जाँच की थी। उस वक्त जाँच प्रभारी अधिकारी की ओर से जो जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी उसमें आरोपों को खारिज कर दिया गया था और पेश किए गए दस्तावेजों को कानूनी महत्व का नहीं होना बताया गया था। जो दूसरी जाँच रिपोर्ट 2023 में सामने आई है जो कि सीएसपी ओमती द्वारा की गई है, उसमें आरोपों को सही पाए जाने की बात कही गई है। एक प्रकरण में पुलिस की दो जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह बात प्रत्यक्ष रूप से सामने आ रही है कि पुलिस की जाँच रिपोर्ट में ही दोषी और निर्दोष होने का पूरा खेल छुपा हुआ है। अब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हुआ है। उच्च न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से अपना-अपना पक्ष रखा गया है। इसके पूर्व में चौदहवें व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड जबलपुर के पीठासीन अधिकारी न्यायाधीश श्री अरविंद सिंह के समक्ष यह व्यवहारवाद प्रस्तुत हुआ था। जिसकी सुनवाई के उपरांत न्यायालय द्वारा राजेश कुमार जैन पिंकी के द्वारा आदर्श अग्रवाल व अन्य पर लगाए गए आरोपी को निरस्त कर दिया गया था।
बिल्डर आदर्श अग्रवाल ने अपना पक्ष रखते हुए जय लोक को बताया कि  उनके खिलाफ  लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। पूर्व में पुलिस जांच और उसके बाद न्यायालय से भी इन आरोपों को खारिज किया जा चुका है।
ऑडिट रिपोर्ट फर्जी होने के संबंध में आदर्श अग्रवाल का कहना है कि उसकी दूसरी प्रति इनकम टैक्स विभाग में जमा होती है अगर पुलिस अपनी जांच के दौरान चाहती तो वह उसे सत्यापित करने के लिए वहां से निकलवा सकती थी।
ऑडिट रिपोर्ट को झूठा कह देने से वह झूठी नहीं हो जाएगी। यह भी एक प्रकार का सरकारी दस्तावेज है। उसके बावजूद आदर्श अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने जाँच के दौरान वर्ष 2013 से लेकर 2014 तक के बैंक ऑफ़  इंडिया में मौजूद खाते का बैंक स्टेटमेंट भी जांच अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया है। जिसमें उनके द्वारा राजेश जैन पिंकी को दी गई 10 लाख और 12 लाख रुपये की राशि की एंट्री है। आदर्श अग्रवाल का कहना है कि बैंक के स्टेटमेंट को तो फर्जी नहीं माना जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने राजेश जैन पिंकी को तकरीबन 12 लाख रुपए नगद भी दिए हैं। जिसका उल्लेख उन्होंने ऑडिट रिपोर्ट में किया है।
आदर्श अग्रवाल ने बताया कि 2007 से लेकर 2022 तक जबलपुर विकास प्राधिकरण द्वारा उन्हें ही उक्त भूखंडों का स्वामी माना है। जेडीए की ओर से पूर्व में पुलिस द्वारा मांगी गई जानकारी के उत्तर में लिखित में यह सूचित किया गया था कि आदर्श अग्रवाल ने प्राधिकरण के अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर यह स्वीकार किया है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ अनुबंध लीजडीड बनाने का कोई आवेदन नहीं दिया है। उनके द्वारा किसी भी सुशील निगम के नाम से कोई पार्टनरशिप नहीं है। आदर्श अग्रवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों का बिंदुवार खंडन किया है और उससे संबंधित दस्तावेज भी जाँच के दौरान प्रस्तुत करने की बात कही।
वर्तमान में यह मामला एक बार फिर उच्च न्यायालय में लंबित है। विगत 2 तारीख को उच्च न्यायालय जारी हुए आदेश में पुलिस को आदर्श अग्रवाल व अन्य के खिलाफ  एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखने एवं अपना पक्ष बताने के लिए रिव्यू पिटीशन दायर की है।
वहीं दूसरे पक्ष की ओर से राजेश जैन पिंकी ने यह कहा है कि तीनों अनुबंध सुशील निगम के द्वारा किए गए। सुशील निगम और आदर्श अग्रवाल के बीच में भी उक्त भूमि को लेकर अनुबंध किया गया है जिसे छुपाया जा रहा है। अकाउंटेंट अमिताभ मुखर्जी ने पत्र जारी कर पुलिस को यह बताया था कि उक्त ऑडिट रिपोर्ट उनके द्वारा हस्ताक्षरित नहीं है। आदर्श अग्रवाल ने जेडीए में पत्र दिया था कि सुशील निगम के नाम से लीज बनाई जाए।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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