
जबलपुर (जयलोक)
आदिशक्ति मां जगदम्बे की उपासना का महापर्व शारदेय नवरात्र बुधवार से प्रारंभ हो गये। नगर के मठ मंदिरों व देवी देवालयों की रंगाई पुताई का काम पूरा हो चुका है। रंग बिरंगी विद्युत छठाओं से मंदिरों को सजाया गया है। देवी देवालयों में जवारों की स्थापना भी हो चुकी है। नौरात्रि पर नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठानों का सिलासिला अनवरत चलेगा। बाजारों में पूजन सामाग्री की दुकाने सज गई है। फलाहारी आईटमों की आवक भी अच्छी हुई है। वहीं अभी तक प्रशासनिक स्तर पर की जाने वाली तैयारियां नदारत है। सडक़ों पर अंधेरा छाया हुआ है स्ट्रीट लाईटें बंद पड़ी हुई है। मंदिरों के आसपास और मुख्य मार्गो पर साफ सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में श्रद्धालुओं को परेशानी हो सकती है। रात में पुलिस गश्त की व्यवस्था भी अब लाजमी हो गई है। बताया गया है कि चेरीताल से दमोहनाका, दमोहनाका से पीली बिल्डिंग तक, दमोह नाका से शांति नगर तक सडके उबड खाबड हैं। जुलूस मार्ग की सडक़ों पर कई जगह गड्ढे उभर आए। बारिश के दौरान कई सडकों पर गड्ढे उभर आए है जिनकी मरम्मत का काम अभी चल ही रहा है। दमोहनाका चौराहे पर फ्लाई ओवर के काम के कारण रोज जाम लगता है, कम से कम 10 दिनों तक सडक़ों को मोटज़्रेबल बनाने के साथ-साथ निर्माण कार्य 15 दिन के लिए बंद कर दिया जाना चाहिए ताकि आवागमन में परेशानी न हो और किसी भी तरह की दुर्घटना न हो। सडक़ों में फैले अतिक्रमण हटा दिए जाने चाहिए, जिससे यातायात बाधित न हो। यहीं हाल अतिक्रमणों का है, रानीताल से लेकर चरहाई तक और गंजीपुरा से लेकर मिलौनीगंज चौराहे तक सडको पर दुकानें लगी है। कपडे वालें तो आधी रोड तक साईन बोर्ड और वस्त्रों के टंगने की प्रदर्शनी लगा रखी है। सडक़ों पर अतिक्रमण होने के कारण यातायात बाधित हो रही है और रही सही कसर ई-रिक्शा और मालवाहक आटो पूरी कर दे रहे हैं। ट्रेफिक का अब तक कोई प्लान सामने नहीं आया है। सडक़ों पर तो सजावट की रोशनी है और स्ट्रीट लाईटे भी ठीकठाक हो गई है लेकिन गलियों के अंदर आज भी अव्यवस्थाओं का आलम हैं जबकि लोग इन्हीं गलियों से आना जाना ज्यादा करते है।
यहां उल्लेखनीय है कि बड़ी संख्या में महिलाएं बड़ी खेरमाई, बूढ़ी खेरमाई मंदिर में जल ढारने रात 3 बजे से ही नहा धोकर घरों से निकल पड़ती है। अंधेरे में मंदिर का रास्ता तय करने के लिए यहां सडक़ों पर स्ट्रीट लाईट और साफ सफाई की व्यवस्था दुरस्त होनी चाहिए। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की पेट्रोलिंग व्यवस्था भी चुस्त होनी चाहिए। रात में आवारागर्दी करने वालों पर कड़ी पाबंदी लगायी जाये ऐसी जनापेक्षा है।
झूल रहे बिजली के तार
वहीं दूसरी तरफ बिजली के तार आज भी झूल रहे हैं। लाईनों का मेंटीनेंस न बरसात में किया गया और न त्योहर में, जिसका खामियाजा फिर एक बार शहरवासी भुगतेंगे। चल समारोह में जब प्रतिमाएं निकलेंगे तो यह तार बाधा बनेंगे और विद्युत अवरोध की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। कमोबेश यही स्थिति इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों के वायरों की भी है। इंटरनेट के तार बहुत नीचे झूल रहे है और कही-कही विद्युत लाईनों से टकरा रहे है। प्रशासानिक विभागों ने अपना अपना काम 50 फीसदी कर ही दिया है लेकिन निजी कंपनियों ने इस दिशा में सुध नहीं ली। आखिरी में परेशानी आम जनता को ही उठानी पडेगी, किसी की इंटरनेट सेवा तो किसी की विद्युत आपूर्ति बाधित होगी।

Author: Jai Lok






