Download Our App

Home » राजनीति » जबलपुर लोकसभा चुनाव-6:लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के मतदान में बड़ा अंतर होता है

जबलपुर लोकसभा चुनाव-6:लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के मतदान में बड़ा अंतर होता है

                            समर शेष है, लोकतंत्र का : राजेंद्र चंद्रकांत राय

(जयलोक)। जबलपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 8 विधान सभा क्षेत्र आते हैं। इन आठों विधानसभा क्षेत्रों में लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांगेस का धुआँधार प्रचार अभियान चल रहा है। इस चुनाव के कुछ माह पहले ही विधानसभा के चुनाव हुए हैं। विधानसभा चुनाव में हुए मतदान और लोकसभा में होने वाले मतदान को लेकर अंतर बना रहता है। अब लोकसभा के इस बार के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार आशीष दुबे और कांगेस के उम्मीदवार दिनेश यादव के बीच चुनावी मुकाबले में हार जीत का अंतर कैसा रहेगा यह चार जून को ही पता चल सकेगा।
पाटन से भाजपा के अजय विश्नोई विधायक हैं, जो एक वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। उन्होंने कांग्रेस के नीलेश अवस्थी को 2023 में हुए चुनाव में दूसरी बार भारी अंतर से हराया है। हाल ही में नीलेश अवस्थी को अपनी दोहरी पराजय के बाद उसी भाजपा में चले जाने की प्रेरणा प्राप्त हुई, जिसके खिलाफ  वे राजनीति का एक लंबा समय बिता चुके हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही ऐसे दलबदलुओं को कचरा निरूपित कर रहे हैं, पर दलबदल करने वालों को अपने कचरेपन से भी कोई शिकायत नहीं है।
बरगी विधान सभा क्षेत्र से भाजपा के ही नीरज सिंह लोधी विधायक निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस के संजय यादव को हराया है। संजय यादव ने 2018 में नीरज सिंह लोधी की माता श्रीमती प्रतिभा सिंह को पराजित किया था। जबलपुर पूर्व की अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट से कांग्रेस के लखन घनघोरिया फिर से विधायक चुने गए हैं। उन्होंने भाजपा के अंचल सोनकर को पराजित किया है। जबलपुर उत्तर से भाजपा के अभिलाष पांडे ने कांग्रेस के विधायक विनय सक्सेना को हराकर यह सीट फिर से भाजपा के पाले में पहुँचा दी है। वे अपनी पार्टी के युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं।
जबलपुर कैंट से भाजपा के अशोक रोहाणी तीसरी बार विधायक बने हैं। उन्होंने कांग्रेस के अभिषेक चौकसे को हराया है। अशोक रोहाणी, विधान सभाध्यक्ष स्व. ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र हैं। इस तरह यह सीट रोहाणी परिवार के पास लंबे समय से है।
जबलपुर पश्चिम से भाजपा के राकेश सिंह विधायक निर्वाचित हुए हैं, वे इसके पहले जबलपुर से 4 बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व वित्तमंत्री और दमदार नेता तरुण भनौत को हराया है। पनागर से भाजपा के सुशील कुमार तिवारी विधायक हैं। वे तीसरी बार विधायक बने हैं। सिहोरा की अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट से भाजपा के संतोष वरकड़े विधायक हैं, उन्होंने कांग्रेस की एकता ठाकुर को हराया है। अब यही एकता ठाकुर भाजपा में चली गई हैं। इस तरह 8 में से 7 विधान सभा क्षेत्रों में भाजपा का कब्जा है और केवल एक सीट पर कांग्रेस का।
विधान सभा चुनाव परिणामों पर एक नजर
विधान सभा क्षेत्र
1-जबलपुर पूर्व
भाजपा को मिले मत 67,932
कांग्रेस को मिले मत 95,674
अंतर 27,741
2-जबलपुर उत्तर
भाजपा को मिले मत 88,419
कांग्रेस को मिले मत 65,764
अंतर 22,655
3 जबलपुर पश्चिम
भाजपा को मिले मत 96,268
कांग्रेस को मिले मत 66,134
अंतर 30,134
4-जबलपुर केंट
भाजपा को मिले मत 76,966
कांग्रेस को मिले मत 46,921
अंतर  30,045
5-सिहोरा
भाजपा को मिले मत 1,01,777
कांग्रेस को मिले मत 59,005
अंतर 42,772
6-पनागर
भाजपा को मिले मत 1,19,071
कांग्रेस को मिले मत 78,530
अंतर 40,541
7-बरगी
भाजपा को मिले मत 1,09,506
कांग्रेस को मिले मत 69,549
अंतर 39,957
8-पाटन
भाजपा को मिले मत 1,13,223
कांग्रेस को मिले मत 82,968
अंतर 30, 255
——————
भाजपा को मिले कुल मत 7,73,162
कांग्रेस को मिले कुल मत 5,64,545
——————
कुल अंतर 2,08,617
——————
इस तरह पूरे लोकसभा क्षेत्र में भाजपा 2,08,617 वोटों से आगे रही थी। वैसा ही रुझाान अब भी हो, यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता, पर लोकसभा और विधान सभा के चुनावों में अंतर तो होता ही है।
भाजपा के राकेश सिंह जबलपुर से सांसद रहे हैं। उन्होंने विधायक निर्वाचित होने पर संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अब राज्य सरकार में मंत्री हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने 8,26,454 मत लेकर, केवल 3,17,029 मत ही पाने वाले कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक कृष्ण तन्खा को हराया था।
आशीष दुबे भाजपा   का नया चेहरा
इस बार भाजपा ने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले आशीष दुबे जैसे नये चेहरे को मैदान में उतारा है। वे एक प्रतिष्ठित और राजनीतिक परिवार से संबंधित हैं। पाटन विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कटंगी उनका मूल स्थान है। उनके पिता अंबिकेश्वर दुबे भाजपा के जबलपुर शहर अध्यक्ष हुआ करते थे। ताऊ त्रयंबकेश्वर गोंटिया कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं।
कांग्रेस के दिनेश यादव
कांग्रेस ने दिनेश यादव को टिकट दिया है। दिनेश यादव जबलपुर नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हें और उन्होंने महापौर का चुनाव भी कांग्रेस की ओर से लड़ा था। वे ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिसने जबलपुर में हुए 1961 के सांप्रदायिक दंगे की भीषणता को रोकने में अपनी ऐतिहासिक भूमिका अदा की थी। दिनेश यादव के पिता जी के बड़े भाई पहलवान शंकरलाल यादव ने अपने सैकड़ों लाठीबन्द पहलवानों के साथ मिलौनीगंज चैराहे पर एक ऐसी अभेद दीवार खड़ी कर दी थी, जिसे भेदकर इस तरफ  के दंगाई उस तरफ  और उस तरफ  के दंगाई इस तरफ  नहीं आ सकते थे। उन्होंने दोनों तरफ  के दंगा पीडि़तों को राशन, दवाइयाँ और दीगर जरूरी चीजें भी मुहैया कराई थीं।
शंकर पहलवान 1973 में जबलपुर के निर्दलीय पार्षद चुने गए थे और निगम की स्थायी समिति के चेयरमैन भी रहे। ऐसी पृष्ठभूमि वाले दिनेश यादव कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे आने का दावा भी कर रहे हैं। भाजपा 400 के पार नारे के साथ चुनाव में उतरी है, पर उसकी यह मंशा पूरी होगी या नहीं ये 4 जून को ही पता चल सकेगा।

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » राजनीति » जबलपुर लोकसभा चुनाव-6:लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के मतदान में बड़ा अंतर होता है