
तेहरान। दुनिया एक बार फिर उस खतरनाक मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां एक छोटी सी चिंगारी पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की आग में झोंक सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच कुछ हफ्तों पहले हुआ युद्धविराम अब लगभग पूरी तरह दम तोड़ चुका है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष विराम अब सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है, जबकि तेहरान और वॉशिंगटन एक-दूसरे पर इस शांति समझौते को तोडऩे के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि यदि यह टकराव और अधिक गहराया, तो इसकी भारी कीमत सिर्फ इन दोनों देशों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ेगी।
दरअसल, इस ताजा विवाद की मुख्य जड़ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) है, जिसे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन कहा जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाला कोई भी सैन्य तनाव सीधे कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक समुद्री व्यापार और दुनिया भर में महंगाई पर गहरा असर डालता है।
जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसने कुछ समय के लिए हालात को शांत किया था। तब तेल की कीमतें नीचे आई थीं और जहाजों की आवाजाही सामान्य होने लगी थी, लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिक सकी।
यह तनाव उस वक्त फिर भडक़ उठा, जब हॉर्मुज से गुजर रहे कई व्यावसायिक कार्गो जहाजों पर अचानक हमले हुए। अमेरिका ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया और जवाब में ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दे दिया कि युद्धविराम को अब खत्म माना जाए। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह ईरान द्वारा जहाजों पर की गई बमबारी का बदला है और अगर ऐसा दोबारा हुआ, तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की है कि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने और ईरान के खतरों को रोकने के लिए नए और व्यापक हवाई हमले शुरू किए गए हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने वॉशिंगटन के इस कड़े रुख को पूरी तरह खारिज कर दिया है और चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि दादागिरी करने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है।
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Author: Jai Lok






