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आखिर किसकी आँख में चुभ गए पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी! अगर अनियमितताएँ पहले भी थी तो संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं दिखी, क्या जिम्मेदारों की भी होगी जाँच?

जबलपुर (जय लोक)। जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्र तिलवारा के समीप स्थित ग्राम घाना से अपने पहले होटल सुकून रिसार्ट की शुरूआत करने वाले पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी ने पिछले कुछ सालों में ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी क्षेत्रों और यहां तक कि जबलपुर से बाहर निकलकर अन्य शहरों में भी अपने होटल व्यवसास का बहुत अधिक विस्तार कर लिया है। इसके अलावा वे भूमि के लेनदेन का व्यापार भी करते हैं। लेकिन पिछले 72 घंटे पूर्व तहसीलदार पर बहुत भारी पड़े हैं। जबलपुर में संचालित होने वाले उनके तीन होटल और रिसार्ट को सील कर दिया गया है। विवेक त्रिपाठी और उनके सहयोगियों के खिलाफ मारपीट, गाली गलौच और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज की गई है। धड़ाधड़ हुई इस कार्रवाही के बाद एक सवाल सबके जहन में कौंध रहा है कि आखिर पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी किसकी नजरों में चुभ गए हैं? आखिर ऐसा क्या कृत्य विवेक त्रिपाठी ने कर दिया जिसने उन्हें किसी के निशाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

सवाल तो यह भी उठ रहा है कि अगर विवेक त्रिपाठी की सभी होटलों और रिसार्ट में गैर कानूनी और आपत्तिजनक गतिविधियाँ चल रहीं थीं तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार क्या कर रहे थे। अगर इतने लंबे समय से जिस्मफरोशी, अवैध रूप से शराबखोरी, घटिया तरीके से संचालित हो रहे किचिन, लंबे समय से फायर सेफ्टी का नहीं होना शिकायतों का आधार था तो फिर आँख बंद कर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को भी जाँच के दायरे में क्यों नहीं लिया जा रहा। इन सब बातों का ध्यान रखने के लिए जिम्मदार लोगों की जिम्मेदारी की भूमिका को जाँच में शामिल क्यों नहीं किया जा रहा?

एक हाथ से नहीं बजती ताली

एक के बाद एक धड़ाधड़ पूर्व तहसीलदार त्रिपाठी के     प्रतिष्ठानों पर हो रही कार्रवाही ने यह बात तो साबित कर दिया है कि प्रशासन अगर चाह ले तो चंद घंटों में बड़ी से बड़ी कार्रवाही को अंजाम दे सकता है और वर्तमान में उसने यह करके भी दिखा दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि वर्षों से इतनी सारी अनियमितताओं के साथ विवेक त्रिपाठी के व्यापार संचालित हो रहे थे तो क्या संबंधित और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी। उन्होंने कभी क्यों नहीं अपनी ओर से इन चीजों की जाँच की। प्रशासनिक स्तर पर आखिर यह चूक कैसे हुई, या फिर यह समझा जाए कि ताली दोनों हांथों से बज रही थी।

ऐसे शुरू हुआ मामला

घटना कटंगी रोड में स्थित विवेक त्रिपाठी के सुकून बीएंडबी होटल से शुरू हुई। यहां धार्मिक संगठन से जुड़े लोगों ने पहुँचकर हंगामा मचाया और यह आरोप लगाए कि यहां जिस्मफरोशी के साथ साथ मुस्लिम लडक़े हिंदू लड़कियों के साथ आते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में जमकर हंगामा हुआ तोडफ़ोड़ और मारपीट हुई। आपत्तिजनक स्थिति में युवक युवती भी पकड़े गए। पुलिस ने बाद में विवेक त्रिपाठी और उनके सहयोगियों पर हिंदू संगठन के पदाधिकारियों से मारपीट और गाली गलौच करने की शिकायत पर मामला दर्ज किया।
दूसरी घटना बरेला क्षेत्र में स्थित ग्राम नेंगई सिरौरा स्थित निसर्ग वॉटर पार्क एवं रिसार्ट में एक 20 साल के लडक़े साजन विश्वकर्मा निवासी मोहनिया सुभाष नगर की करंट लगने से मौत हो गई इसके बाद प्रशासनिक नजरें उक्त स्थान पर भी तिरछी हुईं और जो आजतक कभी जाँच करने नहीं पहुँचे थे वे सभी पहुँचे और जाँच के दौरान इन्हें कई प्रकार की अनियमितताएं मिलीं जिसके बाद उक्त रिसार्ट को सील कर दिया गया।
तीसरी कार्रवाही तिलवारा पुल के आगे ग्राम घाना में स्थित सुकून रिसॉर्ट में हुई। यहां पर भी विभिन्न प्रकार की अनियमितता पाई गईं, पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी का निजी खसरा कम और शासकीय भूमि पर कब्जा अधिक पाया गया। अब इन सभी स्थानों की जाँच पड़ताल परत दर परत होगी। इंच टेप लेकर इन्हें नापा भी जाएगा, सालों से यह व्यवसायिक स्थल संचालित हो रहे थे लेकिन कभी भी जिम्मेदारों ने अपनी ओर से इनकी जाँच नहीं की। अगर गंदगी थी तो पूर्व में ना किचिन में झांका गया, ना फायर सेफ्टी की जाँच की गई, ना राजस्व विभाग ने शासकीय भूमि की चिंता की और ना हीं संबंधित पुलिस ने अनैतिक-आवांछित-असामाजिक-गतिविधियों पर लगाम लगाने खुद से कदम उठाए। अब शासन की सभी इकाइयाँ एकाएक सक्रिय हो गई हैं तो यह सवाल भी सक्रिय रूप से उठ रहा है कि आखिर किसकी आँख में पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी चुभ गए और क्यों?

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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