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आखिर प्रशासन ने लगाई नर्मदा का दोहन कर रही कंपनी के कार्य पर रोक, नदी में पड़े करोड़ों के लोहे को निकालने के लिए गोमती ट्रेडिंग कंपनी महीनों से प्रदूषित कर रही माँ नर्मदा को

जबलपुर (जय लोक)। पिछले 7- 8 महीनों से नर्मदा नदी को प्रदूषित कर कबाड़ बनाकर इसमें जानबूझकर गिराए गए लोहे के जमतरा रेलवे ब्रिज के करोड़ों के लोहे को निकालने के लिए नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही थी। मनमानी करते हुए उज्जैन की गोमती ट्रेडिंग कंपनी द्वारा माँ नर्मदा की छाती पर 300- 400 मीटर तक सडक़ बनाकर उस पर क्रेन,डंपर,हाईवा बेधडक़ चलाए जा रहे थे। इसके साथ ही नदी के बीच में ही लोहा काटने का कार्य गैस वेल्डिंग के माध्यम से किया जा रहा था। जिसके कारण गरम लोहा और केमिकल सीधे नदी में जा रहे थे और नर्मदा में रहने वाली मछली एवं अन्य जीव जंतुओं को इसका काफी नुकसान हो रहा था मछलियां मर भी रही थी। विगत दिनों कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश के परिपालन में मौके पर जाँच के लिए पहुंचे संयुक्त टीम का नेतृत्व कर रहे जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह ने तत्काल काम रुकवाया। वहां मौजूद कंपनी के कर्मचारियों से संबंधित अनुमति एवं उत्खनन कर बनाई गई सडक़ के संबंध में दस्तावेज माँगे, जो मौके पर कोई उपलब्ध नहीं करवा पाया। एसडीएम श्री सिंह ने कहा कि दस्तावेज और संबंधित अनुमति प्रस्तुत करने तक उक्त कार्य में रोक लगा दी गई है।

कलेक्टर ने दिए थे जांच के निर्देश- जय लोक ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और तहसीलदार को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए थे। दोनों घाट खिरनी और जमतरा में प्रशासन की टीम पहुंचीं । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले जमतरा के लोहे के ब्रिज को रेलवे ने कबाड़ घोषित कर नीलम कर दिया था। जबकि इसको ऐतिहासिक रूप से संरक्षित करने के लिए और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए लगातार पुरजोर तरीके से मांग उठी थी। कबाड़ में दे गए इस करोड़ों के पुल के लोहे को नदी से निकालने के लिए उज्जैन की गोमती ट्रेडिंग कंपनी ने ठेका उठाया था। लेकिन ठेके की शर्तों के विपरीत माँ नर्मदा नदी में प्रदूषण और इसको नुकसान पहुंचाने का कार्य लगातार किया जा रहा था। जय लोक द्वारा प्रकाशित खबरों के बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तत्काल इस पूरे प्रकरण की जाँच के आदेश दिए और संबंधित अनुमति को भी जांचने के लिए कहा।रेलवे के पत्र को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया- रेलवे ने संबंधित ठेका कंपनी को एक पत्र लिखकर इस बात के लिए कहा था कि उन्होंने काफी समय से रेलवे की संपत्ति में पड़े कबाड़ हो चुके पुल के अवशेषों को हटाया नहीं है इसलिए वह तत्काल उसे उठा ले। लेकिन संबंधित कंपनी ने इस पत्र का दुरुपयोग करते हुए स्वयंभू तरीके से मनमानी की और मां नर्मदा नदी में बिना किसी अनुमति के प्रदूषण फैलाया और नदी का दोहन करते हुए  300 -400 मीटर तक मुरम,पत्थर भरकर रोड बना दी और नदी की अविरल धारा को रोक दिया।

खिरैनी घाट और जमतरा दोनों घाटों पर किया अवैध सडक़ निर्माण- कंपनी की ओर से माँ नर्मदा की दोनों छोर पर जमतरा और खीरैनीघाट पर दोनों तरफ अवैध रूप से नदी में पड़े करोड़ों रुपए के लोहे को बाहर निकालने के लिए बिना अनुमति के नदी की धारा को रोकते हुए सडक़ का निर्माण किया गया और इस पर क्रेन हाइवा, डंपर, ट्रैक्टर आदि सब चलाए जा रहे थे। नदी को प्रदूषित करने का हर तरह का कार्य हो रहा था।

अंडरटेकिंग के साथ बड़ी सिक्योरिटी राशि करें जमा- उज्जैन की जो गोमती ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से लोहे के पुल को ध्वस्त कर पानी में गिराया गया। मां नर्मदा को प्रदूषित किया गया। यह लोहे का पुल कई महीनों से पानी में पड़ा हुआ है। इसे गैस वेल्डिंग के माध्यम से कट कट कर निकालने का कार्यकाल कई महीनों से नदी के बीच में ही चल रहा है। अब जब सडक़ भी बना दी गई है नदी की धारा भी रोक दी गई है। जब हल्ला मचा तो जिला प्रशासन की ओर से संबंधित ठेका कंपनी को लिखित में अंडरटेकिंग देने के लिए कहा गया था कि लोहा निकाल लेने के बाद से पानी में बनाई गई सडक़ को भी हटाएंगे। लेकिन अगर संबंधित कंपनी ने यह कार्य नहीं किया तो जिला प्रशासन उनका क्या कर लेगा। जानकारों का कहना है का ऐसी स्थिति में बनाई गई सडक़ का मटेरियल नदी से बाहर निकालने एवं नदी को हुए नुकसान की पूर्ति के कार्य में खर्च होने वाली राशि का आकलन कर उसमें 10त्न अधिक राशि सुरक्षा निधि ( सिक्योरिटी राशि) के रूप में जिला प्रशासन के हक में पहले जमा करवाना और समय सीमा तय करना ही उचित होगा।
नदी में रोड बनाने से ठहरे पानी का बढ़ा जलस्तर, यहीं डूबा था युवक- इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक और महत्वपूर्ण बात निकल कर सामने आई है। विगत दिवस इसी घाट पर चोरी की रेत का परिवहन करने वाले एक लडक़े की नदी में डूब जाने से मृत्यु हो गई थी। उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई इस बात की जांच चल रही है। लेकिन गांव के लोग यह मानते थे कि वह तैरना जानता था । जब घटना के कारणों पर चर्चा हो रही थी तब यह बात भी निकल के सामने आई की जिस स्थान पर आकाश उर्फ मयंक बर्मन डूबा था वहां पर पहले कमर तक पानी हुआ करता था, विशेष कर इस मौसम में नदी का पानी काफी कम रहता है। लेकिन ठेके कंपनी के द्वारा उक्त स्थल से लगा कर ही नदी के बीच तक जो सडक़ अवैध रूप से पानी में बना दी गई उसके कारण नर्मदा नदी का बहाव रुक गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि उस स्थान पर जल भराव बढ़ गया और कई फीट ऊपर पानी आ गया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि युवक पुलिस से भाग कर यही सोच कर पानी में कूदा होगा की कमर तक पानी है वह आराम से सुरक्षित निकल जाएगा। लेकिन कंपनी की करतूत का खामियाजा उसे जान देकर उठाना पड़ेगा यह अंदाजा किसी को नहीं था ।
कैसे खुलेगा माँ नर्मदा की अविरल धारा का यह अवरोध- नर्मदा भक्तों के साथ साथ जिला प्रशासन के समक्ष भी बड़ा सवाल यह है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा लोहे के पुल को नीलाम किया गया। लेकिन मां नर्मदा के प्रदूषण से संबंधित किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन द्वारा नहीं उठाई गई। जिसका खामियाजा यह हुआ कि मां नर्मदा नदी की अविरल धारा को रोक दिया गया। इसके साथ ही जिला प्रशासन को भी गलत जानकारी दी गई और कहा गया कि नर्मदा में सडक़ बनाने की अनुमति रेलवे विभाग की ओर से दी गई है। अब वर्तमान में जब मां नर्मदा की अविरल धारा को 300- 400 मीटर तक सडक़ बना दी गई है तो फिर इस अवरोध को कैसे हटाया जाएगा? कैसे मान नर्मदा की अविरल धारा को इस क्षेत्र में पुन: स्थापित किया जाएगा यह सबसे बड़ा सवाल है।

इनका कहना है

कलेक्टर महोदय के निर्देश पर गठित किए गए संयुक्त दल के द्वारा मौके पर जाकर जाँच की गई। वहां मौजूद कंपनी के कर्मचारियों को तत्काल काम बंद करने और पहले संबंधित सभी अनुमति और दस्तावेज प्रशासन के प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। तब तक काम पर पूर्णता रोक रहेगी। उत्खनन के संबंध में भी संबंधित कंपनी से अनुमति प्रस्तुत करने कहा गया है।
अभिषेक सिंह,
एसडीएम जबलपुर

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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