
12 राज्यों में वोटर वेरिफिकेशन 11 दिसंबर तक चलेगा
नई दिल्ली (जय लोक)। चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी है। आयोग ने शनिवार को कहा कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
मतदाता जोडऩे-हटाने का एन्यूमरेशन पीरियड यानी वोटर वेरिफिकेशन अब 11 दिसंबर तक चलेगा, जो पहले 4 दिसंबर तक तय था। वहीं, पहले ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होनी थी, लेकिन अब इसे 16 दिसंबर को जारी किया जाएगा।
दरअसल बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है। इस प्रोसेस में वोटर लिस्ट का अपडेशन होगा। नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और वोटर लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा।

एसआईआर प्रक्रिया में बीएलओ की मौत मर्डर है-कांग्रेस
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार विपक्ष हमलावर हैं। कांग्रेस ने प्रक्रिया के दौरान काम के दबाव के चलते जान गंवाने वाले क्चरुह्र की मौत को मर्डर बताया था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा था कि 20 दिनों में 26 बीएलओ की मौत दिनदहाड़े मर्डर जैसी है। सुप्रिया ने गोंडा के बीएलओ विपिन यादव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके परिवार ने बताया है कि उन पर वोटर लिस्ट से पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम हटाने का दबाव था।
सुप्रिया ने कहा था कि यह कोई कहानी नहीं बल्कि देश के सामने एक कड़वा सच है। इतनी जल्दी क्या है? थोड़ा समय लेकर एसआईआर करवाओ। एसआईआर का मामला कोई छोटा मामला नहीं है। यह वोट चोरी का सबसे ताकतवर तरीका है, और इसीलिए इसका इतने खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है।

एसआईआर मामला सुप्रीम कोर्ट में, 2 दिसंबर को सुनवाई
एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। एसआईआर के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर लगातार सुनवाई हो रही है। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केरल सरकार की याचिका पर केंद्र और राज्य चुनाव आयोग से 1 दिसंबर तक जवाब देने को कहा है। अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
वहीं, तमिलनाडु में याचिका पर 4 दिसंबर और पश्चिम बंगाल की याचिका पर 9 दिसंबर को सुनवाई होगी। इसी दिन चुनाव आयोग राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी जारी करेगा।
बेंच ने कहा- अगर राज्य सरकार मजबूत आधार देती हैं तो हम तारीख बढ़ाने का निर्देश दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर पहले कभी नहीं हुआ, तो यह वजह ईसी के फैसले को चुनौती देने का आधार नहीं बन सकती।





